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जगतहितकाऱणी
करने को लग गये हैं और सब संसार भूखा होने की वजह से चोर चण्डाल हो गये है, और संसार के लोग भी चोरी करने को लग गए है; परन्तु इस बात का कोई भी ख्याल नहीं करते कि संसार में इस कदर धन था वोह कहाँ गया ? सो टूटे हुए धन को रावण के मुवाफिक इन बनियों ने बुद्धि भ्रष्ट करके ले लिया है, सो इस बात की खबर किसी विलायत के राजा बादशाह और रैयत वगैरा तक को नहीं है कि खाने कहाँ गई ? परन्तु इतना कोई भी साहब ख्याल नहीं करते, कि इन बनियों ने जादू के जुलम से जमीन माता को ना ताकत कर दिया है जिससे जमीन के शरीर की चरबी गल गई है इससे धन नहीं रहा; सो अब हम दुनिया का कारोबार कहाँ से करेंगे ? क्योंकि जमीन के शरीर की पहचान संसार के लोगों को इन बनियों ने भुलादी है सो जमीन माता को जादू के जोर से निहायत दरजे का दुख देते हैं। सो दुनिया में भी कहते है कि राक्षसी पाप से जमीन दुख पाती है और रावण-हरनाकुश के वक्त में और किसी-2 वेद शास्त्र में भी लिखा हुआ है कि राक्षसी पाप से जमीन दुख पाती थी, सो यह बनिये भी रावण-हरनाकुश के मुवाफिक जमीन के नामका पाप कराके जमीन को बीमार करके दुख देते है जिससे खानें तक नहीं रही है, और जबसे कि काल पड़ने लगे हैं जबसे जमीन माता दुख पा रही है; और जो कि ग्रहण पड़ता है और जमीन कांपती है और जमीन फट जाती है, सो यह बनियों के जादू से फट जाती है। सो यह तरह-2 के रोग जमीन माता को बलराजा के बाद से करने लगे है, इससे जमीन माता दुबली हो गई है इससे चाँदी-सोने की खानें अब नहीं रही है; सो जिस तरह से कि आदमी के शरीर में चरबी बीमारी के सबब से गल जाती है, उसी तरह से जमीन माता के शरीर की भी चर्बी जादू के जुलम से गल गई है और जबसे कि इन बनियों ने जादू का करना शुरु किया है जबसे ही काल पड़ाते हैं, जब से ही जमीनमाता थोड़ा पानी पीती है और बीमारी से सुख गई है, और इन बनियों ने रावण की तरह से मुझको भी दुखी किया है जिससे इनके जाल की खबर पड़ी है, जिससे मैं आप लोगों को शनिचर की तरह से वाकिफ करता हूँ, क्योंकि संसार के लोगों को और राजा बादशाहों को जादू के जुलम से सुपने के मुवाफिक कर दिए हैं और बुद्धि भ्रष्ट कर दी है जिससे तुम नहीं समझते हो कि बनिये रात-दिन पाप कराते हैं और संसार के लोगों को इस पाप से खराब कर देते हैं। सो दुनिया के लोग मेरी कही हुई बात को दुरस्त नहीं मानते हैं सो यह बुद्धि फेरने का सबब है, और जोकि यह लोग कहते हैं कि रामचन्द्रजी और बलराजा वगैरा अमर हैं और जिन्दा हैं, सो अमर तो कोई नहीं, अमर तो उनका नाम है; परन्तु कोई लोग मेरी कहीं हुई बात को मानके कहते हैं कि हाँ, बलराजा वगैरा अमर नहीं है, तो यह बनिये जादू के जुलम से सोते-जागते सुपने करके उसको दिखा देते हैं। सो यह बनियों का पाप मरे हुए का चहरा होके दिख जाता है, सो जिन-2 के नामका पाप करा दें उसी का चहरा सुझ जाता हैं याने भरतरी और गोरखनाथ और शिवजी महाराज वगैरा के नामका पाप करा दें और चहरा सुझाना होवे तो बनियों का पाप उन्हीं भक्त लोगों का चहरा होके सुझ जावे, कि जो मर गए हैं उनका तो नाम अमर है, और जो देवी-देवताओं के नामका चहरा होके सुझ जावे, और जो भूत-पलीत और डाकन-डाकी, चुड़ेल-खबीस और देव परी व जन वगैरा के नामका पाप करावें तो बनियों का पाप इन्हीं भूत बला वगैरा का चहरा सुझ जावें, जिससे दुनिया यह कहती है कि जो औरत मरी है वोह चुड़ेल हुई है और जो कि आदमी मरा है वोह भूत हुआ है। इसी तरह से किसी को कुछ और किसी को कुछ सुझा देते हैं, सो संसार के लोगों की बुद्धि कैसी कैद की हुई है कि जो झूठी बात को सच्ची ख्याल करके बैठे हुए हैं, और मैं सच्ची और सही बात कहता हूँ उसको खिलाफ समझते हैं; और यह जो कि बनियों ने पाप चलाया है सो संसार के गारत करने के वास्ते चलाया है, और जो कि तुम बुद्धि भ्रष्ट होने के सबब से स्वर्ग-नर्क बताते हो और चौरासी लाख कुण्डियाँ कहते हो वोह बनियों के घर का पाप है, और यह पाप है कि सब विलायतों के मरे हुए लोगों का चहरा होके सुझ जाता है, क्योंकि जब रावण ने राक्षस विद्या चलाई
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