Home About Us Gallery Artical English Contact Us
    Book  
     परमात्माने नमः
     इन्द्रजाल
     रोग-बीमारी
     राक्षसी पाप
     जमीनमाता
     इन्द्रजाल पाप
     चौरासी लाख
     पाप चलाया ह
     गौत्तम ऋषिजी
     सौदागर महाजनांन
     राक्षसी विद्या
     सो वेद-पुराणों
     रकाषसी पाप
     कुण्डियों
     कारुन बादशाह
     हिन्दू-मुसलमानों
     अंग्रेजों
     डॉक्टरों की रोटी
     स्वर्ग-नर्क
     बुद्धि भ्रष्ट
    Artical  
     What is Earth
     जीव हत्या
     राक्षसी मायाजाल
   
   
   
   
   
   
 
जगतहितकाऱणी
क्योंकि पहले इन सौदागर बच्चों ने रावण, हरनाकुश, कंश, कारुन वगैरा और पृथ्वी राज चौहान वगैरा को थोड़ा-सा पाप सिखा करके यह कह दिया था कि तुम राक्षसी पाप करते रहना, अब तुम चार कूंट और चौदा भांण में राज करोगे। सो यह बनिये थोड़ा-सा राक्,सी पाप का करना सिखा देते है, परन्तु असली पाप को अपने कब्जे में रखते हैं, तो वोह यह जानते हैं कि राक्षसी पाप हमारे घर का है और बनियों का नहीं ही, ऐसा ख्याल करने लगते हैं और जाल ही जाल में रावण, हरनाकुश, कंश, कारुन और पृथ्वीराज चौहान वगैरा मारे गये और सौदागर बच्चे अलाहदा के अलाहदा रहे; परन्तु अब इस बात को सोचना चाहिए और समझना चाहिए कि जिन लोगों ने इन सौदागर महाजनांन के शामिल ही जनम पाया है तो उन लोगों को बिलकुल इनके राक्षसी पाप की खबर नहीं पड़ी, बलके जान से वोह लोग मारे गए और जिन लोगों को सौदागरांन ने थोड़ा-सा राक्षसी पाप का करना सिखाया था जिनका नाम अब तक दुनिया में बुराई के साथ मशहूर है, परन्तु यह सौदागर लोग चिंगारी छोड़के आप अलाहदा हो जाते है और दूसरे आपस में लड़ करके गारत होते जाते हैं, परन्तु कदीभी पाप के करने वाले अब तक सती लोग और धरमात्मा लोग कहला रहे है; परन्तु इनके जालों की खबर अब तक किसी को नहीं है और न पड़ेगी। इसी तरह सैकड़ों आदमी इन बनियों के जालों से भूल ही भूल में मारे गए और इशी तरीके और ‘तदबीर’ से यह सौदागर लोग अशली पाप कर रहे हैं और बराबर चला रहे ही नहीं है और न किसी को राक्षसी पाप करी तरफ से शुभा होता है, जब कि यह सौदागर रावण वगैरा की तरह से सातों-आठों विलायतों के लोगों की बुद्धि भ्रष्ट करके भुलावेंगे कि जो भूल की वजह से कुछ ख्याल नहीं करेंगे। फिर मैं सातों-आठों विलायतों को और हिन्दु-मुसालमानों के लोगों को मय तुम अंग्रेजों के पहले से वाकिफ करता हूँ कि इन बनियों का वहीं जाल है कि जिस जाल सेइन्होंने सैकड़ों लोग हिन्दुस्तान में गारत किए हैं, फिर उसी तरह से अब सातों – आठों विलायतों को मय तुम अंग्रेजो के गारत करेंगे और तुमको भी रावण, हरनाकुश वगैरा की तरह से थोड़ा बहुत राक्षसी पाप का करना सिखावेंगे, लेकिन असली पाप का करना तुमको भी नहीं बतावेंगे, और यह भी अजब नहीं है कि तुम अंग्रेजों को राक्षसी पाप का करना रावण की तरह से सिखा दिया हो या न सिखाया हो, क्योंकि बनिये लोग यह कहगते हैं कि अंग्रेज लोग राक्षस है और यही राक्षसी पाप कराते हैं जिससे बारिश वगैरा कम होती है, और इसी से अकल वगैरा कैद हो रही है और इसी पाप की वजह से रोग चाले फैले हुए है; क्यंकि बनिये असली पाप तो आप करते है और भुलाने के लिए और राज करने का लालच बताके दूसरों से राक्षसी पाप करा देते हैं जिससे वोह रावण की तरह से राक्षसी पाप को करने लगते हैं और कर रहे हैं। परन्तु यह मालूम नहीं कि किस तरह का सिखाते हैं? कि जिसका हाल मैं अपनी जबान से कुछ नहीं लिखा सकता, क्योंकि इन सौदागर बच्चों की करतूतों का कुछ अंदाज नहीं है ्योंकि तरह-2 के है और जबकि जाल का करना सिखाते है कि तुम भी राक्,सी पाप का करना सीखो और स्वर्ग बनाओ, जब लालच में आके वोह भी भूल जाते हैं और राक्षसी पाप का स्वर्ग बनाते है और कते है कि राक्षसी पाप का स्वर्ग हमारा है। सो पाप का करना थोड़ा बहुत लालच में आके सीख लेते है और यह जानते है कि हमारा राक्षसी पाप है, परन्तु यह नहीं सोचते कि हमको भुलाया है क्योंकि यह बनिये असली पाप को अपने कब्जे में रखते हैं कि जिसकी खबर अगले सती लोगों को भी नहीं पड़ी बलके जाल में मारे गए कि जैसे रावण, हरनाकुश वगैरा भूल ही भूल में आके यह जानते थे कि हमारा राक्षसी पाप है और इसी वजह से मारे गए, कि जो राक्षसी पाप चार कूंट और चौदा भांण में मशहूर है कि जो देवता सरुपी लोगों की बुद्धि खराब कर दी थी कि जो उन भक्त लोगों को कुछभी नहीं सुझता था, कि जो गारत होने के वक्त तक रावण,
  Previous   First 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112...125...140... 155...160...   next  
Home About Us Artical Gallery Contact Us Download Hindi Font
Copyiright @ 2007 Jagathitkarni.org. All rights reserveed