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जगतहितकाऱणी
कि हमारा जाल प्रगट नहीं होगा, क्योंकि यह सौदागर लोग संसार के गरात करने के सबब से राक्षसी पाप करा रहे हैं, और जो कि किताब औतार चरित्र वगैरा की है, उसमें लिखा हुआ है कि ‘‘अब ऐसा जमाना तंग दिन-2 आवेगा कि जो मैं बार-2 नहीं लिख सकता हूँ, क्योंकि उन किताबों के देखने से और पढ़ने से ऐसा रंज होता है कि उस जमाने को न देखने के लिए जहर खा लूँ’’ क्योंकि संसार समझाने से भी नहीं समझता है, हालांकि संसार इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि अब जमाना खराब है और खराब ही आता-जाता है और बदकारी का हाल भी आपस में बहन-भाई के सुना जाता है, परन्तु अब तक ख्याल नहीं होता, हालांकि मैं चाहता हूँ कि सब राजा बादशाह और संसार के लोग एक दिल होके मेरा कहना माने और हर तरह की मदद से इस बारे में कोशिश करें तो फोरन यह राक्षसी पाप इन सौदागरांन का छूट जावे, तो फिर कोई कम उम र में न मरने पावें कि जैसा सौदागर लोगों के जादू से हो रहा है, कि जिसको संसार के लोग अच्छी तरह से जानते हैं और फिर भी तकलीफ उठाते है और फिर इन किताोबं की लिखी हुई बातों को परमेश्वर की कुगदरत बयान करते है और उसको दुरस्त जानते है कि जो किताबों में बुरा होने की आगमें लिखी हुई है वैसा ही पाप करा-2 के बुरा कराते जाते है। जिससे यह किताबें सच्ची हो जाती है वैसा ही बुरा ोता जाता है; सो भाई मेरे हो, यह तुम्हारे समझ की बात है कि जिन किताबों में बुरा होने का हाल लिखा हुआ है उन किताबों को ही तुूम मानते हो, परन्तु वोह किताबें परमे्श्वर की बनाईहुई नहीं है, वोह तो सदागर बच्चों की बनाई हुई है और चलाई हुई है, परन्तु तुम हिन्दू-मुसलमान के नाम से और तुम्हारे बुजर्गों के नाम से लिख करके पकड़ा दी है, जिसकी वजह यह है कि जो कोई इन किताबों का हाल दरियाफ्त करेगा तो इस हिकमत से हम सदागर बच्चों का नाम नहीं लगेगा और तमाम जहान के लोगों का नाम होगा। सो देखो भाई, जो किताबों में आगम लिखी हुई है सो उन लिखी हुई आगमों से तो कुछ नहीं होता, परन्तु यह बनिये दरियाओं पार कि जहाँ चौरासी लाख कुणिडियाँ राध लहू की बनाई है और तमाम जहान के लोग उसको स्वर्ग-नर्क कहते हैं, कि वहाँ पे स्वर्ग है; सो वहाँ पर स्वर्ग है न नर्क है, और जो है तो जमीन माता ही है जिसको कि तुम लोग जानते हो वोह बनियों के घर का राक्षसी पाप है, इससे संसार में बुरा होता है और वोह आगम की बात किताबों की सच्ची हो जाती है और जैसा कि किताब औतारचरित्र में लिखा है कि बहुत ही बुरा वक्त आवेगा, सो जब यह बनिये बहुत बुरा होने का और बहुत बुरा वक्त आने का पाप करावेंगे, तो वैसा ही हो जावेगा कि जैसा किताब औतारचरित्र वगैरा में लिखा है और अब जो मैं तमाम हान के लोगों को इनके जालों से साफ तौर से वाकिफ करता हूँ तो कुछ ख्याल में नहीं लाते हैं और बनियों के जाल को झूठा जानते हैं और आगमों को सच्चा जानते है और कहते हैं, कि यह आगमें हमारे बुजर्गों की भाखी हुई है। सो यह अकल का सबब है, क्योंकि इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से तमाम जहान के लोगों की अकल ऐसी कैद कर दी है कि जिससे वोह जाल की किताबों को अपनी जानते हैं; सो मेरे भाइयों, तुम्हारी नहीं है, यह तो बनियों के घर की है और अपना नाम जाहिर न होने के लिए तुम्हारे बुजर्गों का नाम रावण की तरह से छल करके किताबों में लिख दिए है, कि जिस तरह से रावण ने ऋषिश्वरों के नाम लिख दिए थे, जिससे ऋषिश्वर लोग उन किताबों को अपनी जानते थे, फिर उसी तरह से इन सौदागर बच्चों ने भी हिन्दू-मुसलमानों के बुजर्गों के नाम किताबों में लिख के पकड़ा दी है। सो यह किताबें जाली इन सौदागरांन की है, सो उन किताबों को अपनी मत जानो और न इन्हों को पढ़ो, बलके इन किताबों से परहेज करके अलाहदा रहो और जिसके पास देखो उसको समझाओ, तो इन सौदागरांन का राक्षसी पाप जल्द दफे होवे तो संसार के लोगों को आराम मिले। अब ऐ अंग्रेज लोगों, मैं तुमको हाथ जोड़कर अर्ज करता हूँ सो सच-2 मानो, क्योंकि मेरे नजदीक तो तुम सातों-आठों विलायतों के राजा बादशाह एक हो और माँ-बाप के मुवाफिक हो, इसी तरह से हिन्दुस्तान के राजा बादशाह वगैरा भी माँ-बाप के मुवाफिक हो, परन्तु जो कि मैं आप लोगों की खिदमत में अर्ज करता हूँ कि कदीमी जाल हिन्दुस्तान के महाजनांन का है; परन्तु यह सौदागर लोग जाहिरात में नहीं आथे है और राक्षसी पाप करते रहते हैं,
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