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जगतहितकाऱणी
सो सातों-आठों विलायतों के लोग और अंग्रेज वगैरा अपनी-2 औलाद बचने के लिए इन सौदागर बच्चों से राक्,सी पाप का करना छोड़ाओ, जब तुम्हारी औलाद बचेगी; क्योंकि यह जाल तुम्हारी ही औलाद से छूटेगा और इसका बन्दोबस्त होगा, जब ही हिन्दुस्तान के लोग भी इन बनियों के जालों से छउकारा पावेंगे, वरना कई उम्मेद नहीं है जो बचें, क्योंकि िन्होंने तमाम राजा बादशाहों की अकल कैद कर दी है कि जो समझािने से भी नहीं समझते हैं, और जो कि सातों-आठों विलायतों के लोगों की अकल खराब कर दी है, जिसकी वजह यह है कि यह सौदागर बच्चे चार कूंट में और चौदा भांण में अपना राज किया चाहते हैं। इससे तुम सातों-आठों विलायतों के लोगों की अखल भी कैद कर दी है कि जो चाँदी-सोने की खानों की तलाश नहीं करते, कि पहले जमाने में चाँदी-सोने की खानें जो थी वोह कहाँ गई? क्योंकि जमीन तो वोह की वहीं है, परन्तु खआनें कहाँ गायब होे गई? कि जो अब नहीं है, परन्तु तलाश तो करें; सो तलाश तो कोई भी साहब किसी मुलक के नहीं करते हैं और ना यह ख्याल करते हैं कि वोह खानें क्यों और किस वजह से अलोप हो गई है? सो यह बड़ी भारी गफलत तुम सातों-आठों विलायतों के लोगों की है, कि जो तुम तलाश नहीं करते हो। तुम लोग भी खानों की तलाश इस वजह से नहीं करते हो कि तुम लोगों की अकल इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से फेर दी है, कि जो खानों की तलाश करने की तरफ तुम लोगों का दिल नहीं होता है बलके ऐसा ख्याल करते हो कि खानें कदीम से मौजूद नहीं थी; सो भाई मरे, यह खानें चाँदी-सोने की कदीम से हर एख मुलक में और विलायतो में मौजूद थी कि जिसको जमीन के शरीर की चरब कहना चाहिए, परन्तु जैसि कि यह बनिये जमीन माता के नाम का पाप कराते हैं जबसे जमीन के शरीर की चरब गल गई है। इससे जमीन माता निहायत दरजे का दुख पा रही है कि जमीन पर अच्छी तरह से अनाज वगैरा नहं होता है और काल वगैरा पड़ता है, सो यह सब जादू का खेल है, और जो बरसात अच्छी तरह से होवं तो जमीन को सरद-गरम की बीमारी कर देते हैं कि जिसकी वजह से जमीन को ‘बदहजमी’ का रोग होकर दिन-2 जमीन माता ना ताकत होती जाती है, फिर इशी सबब से जमीन कोई-सी चीज खाने की नहीं होती है। मिसाल इस तरह पर है, कि जब कोई आदमी को बीमारी किसी किसम की हो जाती है तो वोह शख्स कुछ खाना वगैरा नहीं खा सकता है और न काम कर सकता है; अगरचे उसने खाना खाया भी होवे तो वोह बदहमजी के सबब से वोह बीमार आदमी कैसी मुसीबत उठाता है और सब कामों से निकम्मा हो जाता है। फिर इसी तरह से यह जमीन माता भी तरह-2 की बीमारियाँ पा रही है जिससे कोई चीज जमीन पर पैदा नहीं होती है और जबकि यह सौदागर बच्चे जमीन के नाम का पाप ज्यादा करावेंगे जब जमीन के उपर कुछ भी पैदा नहीं होगा, तो फिर कहाँ से कुल विलायतों के लोग खाने-पीने का गदुजर करेंगे? फिर न मौजूद होने, अनाज वगैरा के सपबब से आदमी को मार के आदमी खावेगा; और जो कि किताबें बनियों की बनाई हुई है और उनमें यह बातें लिखी हुई है कि जिनका नाम (औतारचरित्र) वगैरा है, परन्तु इन किताबों में इन सौदागर लोगों ने अपनी अकलमंदी से राक्षसी पाप जाहिर न होने के सबब से अगले सती लोगों का नाम, रावण वगैरा की तरह से लिख दिए है और रावण वगैरा ही की तरह से यह बनिये छल कर रहे हैं, कि जैसे रावण ने राक्षसी वेद की किताबें अपना जाल फैलाने की गर्ज से ऋ षिश्वरों को पकड़ा दी थी और नाम भी किताबों में ऋषिश्वरों के बुजर्गों के लिख ने भी अपना जाल फैलाने के गर्ज से और आप तरक्की पाके राज करने के लिए राक्षसी वेद की किताबें और टीपना वगैरा ब्राह्मणों को और राजा बादशाहों को और तमाम जहान के लोगों को बाद मरने राजा, बलके किताबों में बुजर्गों के नाम लिखकर रावण की तरह से दे दी है। जिससे तमाम जहान के लोग उन किताबों को अपनी जानके अपने काम में ला रहे है लेकिन यह नहीं समझते है कि यह किताबें सौदागरांन की है और नाम जो किताबों में हमारे बुजर्गों का लिखा है, सो रावण की तरह से छल करके लिख दिया है; परन्तु यह किताबें इस गर्ज से पकड़ा दी है
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