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जगतहितकाऱणी
संसार को इन बनियों के राक्षसी पाप से तुम तमाम जहान के लोगों को वाकिीफ करता हूँ, क्योंकि यह कदीमी जाल इन बनियों का ही है, इससे यह ख्याल होता है कि रावण वगैरा को भी इन बनियों ही ने अपने राक्षसी पाप से मरवाया होगा, यह बात भी इनके जाल की ही मालूम होती है, क्योंकि ‘‘मै इस भेद से बेखरबर नहीं हूँ’’ परन्तु मुझको इन सौदागर बच्चों ने अपने राक्षसी पाप से दुखी किया है इससे इनका राक्षसी पाप जाहिर होता है, कि खास इनके ही घर का है, बलके मैं सबूत इस तरह से देता हूँ कि जिस तरह से यह बनिये राजा बादशाह के हाथों से अपने जाल को जाहिर न होने के लिए करावेंगे या कराते होंगे; परन्तु असली पाप को अपने कब्जे में रखेंगे और भुलाने के लिए थोड़ा बहुत पाप दूसरों के हाथों से करावेंगे। फिर इसी तरह से इन सौदागर बच्चों ने राजा रावण, और हरनाकुश, और कंश कारुन वगैरा को थोड़ा बहुत राक्षसी पाप का करना सिखाया होगा, परन्तु असली पाप का करना अपने कब्जे में रखते है; फिर यह बात काबिल ख्याल करने के है कि जनिन लोगों ने पहले जमाने में राक्षसी पाप चलाया था और उन पाप करने वालों का पाप करना जाहिर हुआ तो तमाम जहान के लोगों ने उस पाप का, जुलम करने वालों को गारत करके छोड़ाया कि जो जुलम करने वालों की औलाद को भी जिन्दा नहीं छोड़ा और यह समझा कि जब हम ऐसे बुरे काम करने वालों को मय औलाद के गारत कर देंगे तो जहान में फिर कोई पाप का करने वाला नहीं होगा, तो तमाम जहान को हर तरह से आराम मिलेगा, परन्तु रावण वगैरा की तरह से अब भी राक्षसी पाप हो रहा है कि जिसका बन्दोबस्त न होने के बारे में, मैं पहले कुल जहान में जिकर कर चुका हूँ और उशका मुझको यह यकीन था कि अब कभी नहीं होगा; क्योंकि पाप करने वालों को मय औलाद के गारत कर दिया है। अगर यह पाप उन्हों का नहीं होता तो यह कभी ऐसा बुरा काम न करते, और रावण वगैरा की तरह से गारत होने का अपने दिल में डर रखते, कि पहले पाप करने वालों को गारत किया है; अगर हम लोगों की भी संसार के लोगों को खबर पड़ गई तो हमारी भी हालत पाप करने के सबब से बुरी करेंगे। सो भाई मेरे, अगर राक्षसी पाप खास इन सौदागरांन का नहीं होता तो यह शख्स, मारे दहशत के कभी इस काम को नहीं करते; परन्तु असल में पाप इन्हों का ही है और चौड़े नहीं आने के वास्ते दूसरों को खिखाते है और दूसरों की औलाद मारी जाती है और आप बचे के बचे रहते हैं। इससे यह बनिये बराबर पाप को करवा रहे है क्योंकि, इन्होंने अपने राक्षसी पाप के जादू से तमाम हिन्दुस्तान को गारत कर दिया है और दूसरी बादशाहतों को भी गारत किया चाहते हैं, जिसका हाल मुझको इस वजह से मालूम हुआ है कि मुझको इन सौदागर बच्चों ने अफने राक्षसी पाप से तरह-2 की तकलीफें दी है जिससे इन्हों का कुल जाल जाहिर हो गया, जिसको मैं साफ तौर से लिख चुका हूँ। परन्तु हिन्दुस्तान के हिन्दु-मुसलमान तो अब तक इस हाल से ना वाकिफ है और ना अब तक उनको किसी कदर भी ख्याल होता है और न कहने से यकीन होता है, और ऐसी अकल खराब हो गई है कि जैसे शराबी आदमी की अकल खराब हो जाती है और उसको अपने शरीर की खबर नहीं रहती है और न कुछ घर का कारोबार कर सकता है। सो यह राक्षसी पाप के सबब से अकल खराब हो गई है कि जिससे बनियों के जाल की पहचान अब कहने से भी कोई साहब नहीं कर सकते हैं, और न ख्याल करते हैं; हालांकि सौदागरांन के जाल से दिन2 गारत होते जाते है और सौदागरांने के शामिल ही सब लोगों ने जनम पाया है, परन्तु सौदागरांन के जाल का किसी को भी भेद नहीं है और सौदागरांन हिले-मिले रहते हैं परन्तु जाल की पहचावन तो भी नहीं करते, जिसकी खास वजह यह है कि इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से तमाम जहान के लोगों की अकल खराब कर दी है इससे संसार के लोगों को भी कुछ खबर नहीं पड़ती है और न किसी किसम का शुभा होता है। हालांकि इन बनियों की दुकाने दूसरी बादशाहतों में पहुँच गई है और पहुँचती जाती है, कि जिस तरह से हिन्दुस्तान के लोगों की अखल खराब कर दी है, इसी तरह
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