Home About Us Gallery Artical English Contact Us
    Book  
     परमात्माने नमः
     इन्द्रजाल
     रोग-बीमारी
     राक्षसी पाप
     जमीनमाता
     इन्द्रजाल पाप
     चौरासी लाख
     पाप चलाया ह
     गौत्तम ऋषिजी
     सौदागर महाजनांन
     राक्षसी विद्या
     सो वेद-पुराणों
     रकाषसी पाप
     कुण्डियों
     कारुन बादशाह
     हिन्दू-मुसलमानों
     अंग्रेजों
     डॉक्टरों की रोटी
     स्वर्ग-नर्क
     बुद्धि भ्रष्ट
    Artical  
     What is Earth
     जीव हत्या
     राक्षसी मायाजाल
   
   
   
   
   
   
 
जगतहितकाऱणी
परन्तु कोई बातें काबिल समझने के नहीं है यह तो वैसे ही बनियों के पीछे पड़े हुए हैं, सो सभा वाले और मुलकों के राजा बादशाह और रैयत वगैरा नहीं समझते है कि बाबा हजारों रुपया खरच करके और राजाओं और गरीबों से और अमीरों से मदद लेके हम लोगों को समझाता फिरता है, सो जरूर कोई न कोई बात ऐसी है, नहीं तो यह शख्स क्यों रुपया खरच करे और अपने उपर तकलीफ उठावें ? सो नहीं समझते हैं; सो उन लोगों के ना समझने का यही है कि उन्हों की अकल इन सौदागरांन ने अपने राक्षसी पाप से ऐसी फेर दी है जिससे नहीं समझते है और ऐसा कहने को लग जाते है कि यह बात बाबा बनियों के वास्ते नहीं कहता है और बनियों का नाम तो बाबा भुलाने के बास्ते बताता है, परन्तु अंग्रेजों के निसबत कहता है क्योंकि अंग्रेजों ने हिन्दुस्तान को ले लिया है और इन्होंने ही कुल धन हिन्दुस्तान का अपने कब्जे में कर लिया है। सो यह सबब संसार के लोगों की अकल का है, कि जो अंग्रेजों के उपर इन बनियों के राक्षसी पाप को टालते है, यह पाप करने वाले सौदागर बच्चे ही है और इन सौदागर बच्चों ही ने हिन्दुस्तान का धन अपने राक्षसी पाप से कब्जे में कर लिया है, परन्तु यह बन्ये अपने पाप को जाहिर नहीं होने के लिए लोगों के दिल में कुछ का कुछ सुझाते है जिससे वो लोग भी कुछ का कुछ कहने को लग जाते हैं; अगरजे सभा में बनिये लोग भी बैठे होवे तो बनिये सभा वालों की राय से कहने को लग जाते हैं कि बराबर, यह जाल अंग्रेजों के उपर लिखा है सो यह बात सच है और हम बनियों की बात नहीं ! क्योंकि अंग्रेजों के यहाँ राक्षसी पाप होता है। सो ऐ भाई मेरे, यह राक्षसी पाप इन सौदागरांन के होता है और भुलाने के वास्ते अंग्रेजों का नाम लगाते है औऐर अपना राक्षसी पाप करके और अकल को खराब करके खुश होते हैं और अपने कुल में जिकर करते हैं कि हमारा राक्षसी पाप जाहिर नहीं हुआ है, क्योंकि तमाम जहान के लोग इनके बताने से यह जानते हैं कि यह राक्षसी पाप नहीं और अंग्रेजों का राक्षसी पाप चल रहा है; सो ऐ भाई बनियों, तुम संसार के नाम से राक्षसी पाप, बाबत अकल फिरी हुई रहने के और अपना पाप किसी को ना समझने देने के बलके अंग्रेजों का पाप सुझाने के कराते हो, सो यह हिन्दुस्तान के बनिये उन पाप करने वालों बनियों के पास खरच वगैरा भेजते है, कि जहाँ पर चौरासी लाख कुण्डियां राध लहू की बनाई है, वहाँ पर पाप कराते हैं। सो देखो भाई, कराते तो पाप को बनिये और लोगों के दिल में अंग्रेजों का सुझावें, जिससे संसार के लोग अंग्रेजों के उपर मेरी कहीं बात को समझते हैं परन्तु यह बनिये दूसरों के नाम सुझाके आप भले के भले रह जाते हैं और जबकि बनिये मेरे दर्शन करने को मेरे पास आते हैं, तो मैं उनसे दरियाफ्त करता हूँ कि तुम सच-2 बोलो और भविक्षण की तरह से सलामत रहना चाहो तो राक्षसी पाप के करने को अपने कुल में से छोड़ाओ, परन्तु यह बनिये मेरे कहने को कब मानते है, बलके राक्षसी पाप रात-दिन कराके लोगों की अकल को खराब कर देते हैं जिससे संसार के लोगों को नहीं समझने देते है, जिससे वो लोग यह कहते हैं कि हम तो अंग्रेजों का ही राक्षसी पाप जानते है जबकि वोह यह कह चुकते है। जब फिर मैं उन्हों को इन सौदागरांन के राक्षसी पाप से तमाम जहान के लोगों को समझाता हूँ और कहता हूँ कि जो तुम अंग्रेजों के निसबत कहते हो, सो खिलाफ बात है और जाल बनियों का चलाया हुआ है; क्योंकि अंग्रेज तो अब आए हैं और इन्हों को थोड़ा ही अरसा हुआ है, परन्तु इन बनियों का पाप तो बलराजा के बाद से हुआ हैं, सो हो रहा है। परन्तु जबकि अगले जमाने के राजा बादशाह ने इन सौदागरांन के उपर राक्षसी पाप दफे कराने के सबब से हमला किया था और कुल राक्षसी पाप दफे कराने के लिए सौदागरांन से दरियाफ्त किया था, सो इन्होंने अपने राक्षसी पाप को नहीं बताया था जब बादशाह ने इन लोगों के मंदिरों को गिरवा-2 के मंदिरों की पुतलियों को खण्डन किया था, जिसका सबूत अब तक मौजूद है; सो ऐ हिन्दू-मुसलमान, उस जमाने में अंग्रेज कहाँ आए थे ? जो तुम अंग्रेजों का जाल जानते हो,
  Previous   First 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92...105...130... 145...160...   next  
Home About Us Artical Gallery Contact Us Download Hindi Font
Copyiright @ 2007 Jagathitkarni.org. All rights reserveed