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जगतहितकाऱणी
तो अब इसी तरह से यह सौदागरांन भी करते होंगे जिससे हम लोगों की अकल ऐसी खराब हो रही है कि जो परमात्मा की भक्ति करते हैं तो एकाएक तबियत भगती करने से डांवाड़ोल हो जाती है; सो यह सबब बेशक सौदागरांन के राक्षसी पाप का है कि जो हम लोग इनके पापों को परमेश्वर की कुदरत नहीं है बलके सौदागरांन के राक्षसी पाप की कुदरत है कि जिससे कम उमर में संसार के लोग मर जाते हैं फिर इसका बन्दोबस्त करना और होना वाजिब है। सो ऐ भाइयों, मैं इसी गर्ज से आप लोगों को मुलकों-2 में जा-जा के सौदागरांन के पाप से वाकिफ करता हूँ कि यह पाप सब संसार की मदद से दफे हो जावे तो सबको आराम मिले और “किताब के सुनाने का और मेरे समझाने का और हजारों रुपया खर्च करने का यही सबब है, वरना मुझको इस कदर तकलीफ उठाने से क्या काम ?” परन्तु संसार को राक्षसी पाप से गारत होते देखा, फिर पहाड़ों का रहना और जंगल की बूटियों और फल-फूल का खाना छोड़के और आप लोगों को वाकिफ करके इन सौदागरांन के जालों को दफे कराना दिल से वाजिब समझा और अपने उपर संसार की औलाद को आराम हासिल होने के सबब से तकलीफ उठाना बेहत्तर समझा, और ख्याल किया कि ‘पहले भी जिस शख्स को काफिरी जाल की खबर पड़ी थी उसने अपना करज़ जानके और रोटी खाना हराम जानके छोड़ाने की कोशिश की,’ जिन्हों की बातें दुनिया में अब तक प्रगट है और मैं भी चन्द जगह, कि जहाँ-2 उन लोगों के नाम दर्शाने मुनासिब समझे हैं, किताब में लिख दिए और अब फिर भी आप लोगों के समझने के लिए उनका हाल लिखता हूँ कि जिन्होंने राक्षसी पाप चलाया था और छोड़ाया था; सो भाई मेरे हो, कि जिस तरह से अब इन सौदागरांन का राक्षसी पाप चल रहा है सो इसी तरह से पहले रावण ने राक्षसी पाप चलाया था और संसार के लोगों की अकल फेर दी थी, परन्तु रावण ने शनिचर को अपने राक्षसी पाप से दुखी किया जब शनिचर को मालूम हुआ कि यह तो राक्षसी पाप है और तमाम दुनिया इसी राक्षसी पाप में कैद हो रही है, फिर पाप का जाहिर करना और संसार के हाथों से उनके पाप को छोड़ाना वाजिब है। इससे शनिचरजी ने रावण के राक्षसी पाप से तमाम जहान को वाकिफ किया, जब रावण के छोटे भाई भविक्षण ने अपने बड़े भाई रावण से राक्षसी पाप बंद करने को कहा, कि अब शनिचर को तुम्हारा राक्षसी पाप मालूम हो गया है इस वजह से तुम्हारी किताबें संसार के लोगों को नहीं पढ़ने देता है; इससे अब संसार के लोगों की अकल को ज्यादा खराब मत करो, अगर शनिचर की अकल को ज्यादा खराब करोगे तो शनिचर अपनी औलाद को मरवा देगा; क्योंकि जमीन माता के उपर राजा बादशाह, रैयत समेत बहुत है और अपनी औलाद वगैरा कम है, सो जबकि शनिचर ज्यादा तकलीफ पाएगा तो तकलीफ पाने के सबब से तुम्हारे राक्षसी पाप से तमाम जहान को वाकिफ करके उनके हाथों से अपनी औलाद को मरवा देगा, क्योंकि शनिचर को तुम्हारे राक्षसी पाप की कुल खबर है इससे इन्हों की ज्यादा अकल मत फेरो, इससे रावण ने अपने भाई भविक्षण के कहने को कबूल करके, शनिचर की डर से, लोगों की अकल को फेरना छोड़ दिया। इससे रावण के राक्षसी पाप को संसार फौरन समझ गया, जिससे शनिचर ने बहुत दुख नहीं पाया, और अलावा भविक्षण भी ज्यादा अकल खराब न करने देने की वजह से अपना नाम दुनिया में सलामत रख गया; परन्तु यह बनिये ऐसे बेईमान है कि जो मैं गरीबों-अमीरों को समझाने के वास्ते जाता हूँ तो यह राक्षस विद्या के पाप से ऐसा सुझाते है कि बाब को ‘शनिपात’ हो गया है, परन्तु मैं इन बातों पर ख्याल न करके फिर उन्हीं लोगों को ज्यादा समझाता हूँ और उन्हीं से बातें करने लगता हूँ तो यह बनिये लोग अपने राक्षसी पाप से उनकी अकल को फेर करके ऐसी-2 बेजा बातें उनसे, मुझको कहलाते है, बलके वोह लोग मुझको धक्के देते हैं, चुनाचे मैं लाचार पीछे वापिस चला आता हूँ, तो मेरे वापिस आने के बाद वोह सभा के लोग यह कहने को लग जाते है कि बाबाजी बड़े है, जो कहते है सच कहते है;
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