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जगतहितकाऱणी
सो हिन्दुस्तान में आने वालों की बुद्धि ऐसी कैद कर देते हैं फिर अकल खराब किए हुओं को देखते हैं कि अब इन्हों की अकल निहायत खराब हो गई है, जब हिन्दुस्तान में लाते हैं और हिन्दुस्तान का कुछ धन बता देते हैं और सब अपने काबू में रखते हैं, परन्तु उस बाकी धन को अपने राक्षसी पाप से किसी टापु पर खेंच के जमे कर लेते हैं कि जहाँ रात-दिन राक्षसी पाप कराते हैं, परन्तु यह सौदागर महाजनांन अपनी-2 जबान से संसार के लोगों पर ऐसा जाहिर किया करते हैं कि “जब तक अंग्रेज हिन्दुस्तान में नहीं आए थे जब तक यह अंग्रेज अपनी विलायत में बहुत तंग हाल से थे और भूखे मरते थे,” और यह बनिये लोग पहले से संसार में ऐसी-2 बात चला देते है जिससे संसार में सुन-2 के बात करते है कि अंग्रेज वगैरा पहले अपनी विलायत में भूखे मरते थे, जिसकी बजह यह है कि अंग्रेजों के पास पैसा नहीं था इससे दुखी थे; सो इस बात को बनियों ने अपनी जबान ते तमाम दुनिया में जाहिर कर रक्खा है कि जिससे तमाम जहान के लोग भी ऐसा ही जिकर करते है कि अंग्रेजों के पास धन नहीं था, इससे यह अंग्रेज अपनी विलायत में भूखे मरते थे परन्तु जबसे हिन्दुस्तान में आए हैं जबसे भूखे नहीं मरते हैं, क्योंकि जबसे ही इनके पास धन हुआ है, सो यह बात सौदागरांन के राक्षसी पाप की है, कि जिस विलायत के लोगों को भूखे मरते करना मंजूर होवे तो यह बनिये अपने राक्षसी पाप से करके दिखा देते है; बलके परमेश्वर ने तो किसी को दुख नहीं दिया है, बलके हर तरह का सुख दिया है, परन्तु यह बनिये अपने राक्षसी पाप से धन को खेंच लेते है जब वोह बगेर धन के भूखे मरने लगते हैं। इससे मैं आप लोगों को इन सौदागरांन के राक्षसी पाप से वाकिफ करता कि सतजग में बीमारी का हाल सुनने में नहीं आता था क्योंकि काल वगैरा और ‘डाड़चाला’ वगैरा नहीं होते थे और न जमीन को दुख था, परन्तु बलराजा के बाद से इन सौदागरांन ने तरह-2 की बीमारियाँ जमीन माता को और आदमियों वगैरा को कर दी है इससे दुनिया में बुरा हो रहा है; परन्तु परमेश्वर किसी का बुरा नहीं करता है, सो यह बुरा होना और काल वगैरा पड़ना और चाँदी-सोने की खानों का गल जाना, सौदागरान के राक्षसी पाप से है, सो इनके राक्षसी पाप को छोड़ाना चाहिए और इन बनियों से यह भी दरियाफ्त करना चाहिए कि जो बनिये यह कहते है कि अंग्रेजों की विलायत में धन नहीं था परन्तु जब से कि हिन्दुस्तान में आए हैं जबसे इनके पास धन हुआ है वरना इनके पास धन नहीं था, सो ख्याल करने की बात है कि धन तो सब ही विलायतों में था फिर यह बनिये तुम अंग्रेजों को किस तरह से भूखे मरते हुए बयान करते हैं, इससे मुझ गरीब साध (अनोपदास) की हाथ जोड़के अर्ज है कि जब कुल विलायतों में धन था तो तुम्हारी विलायत का धन कहाँ गया ? जिसकी तलाश करो, सो जिसके हाल से मैं आप लोगों को वाकिफ करता हूँ कि किसने तुम्हारी विलायत के धन के उपर जादू किया है जिससे तुम्हारी विलायत में तुम्हारा कदीमी धन नहीं रहा जिसकी तलाश तुम अंग्रेज लोगों, मेरे कहने से करो; क्योंकि पहले जमाने में तो सब विलायतों के अन्दर चाँदी-सोने की खानें थी जिससे धन का टोटा नहीं था क्योंकि “चाँदी-सोना खानों में सो खोद-खोद के निकलवा लेते थे और उनके बरतन वगैरा बनवा लेते थे” और जो-2 काम जरूरत के होते तो उस सोने-चाँदी का रुपया और मोहरें तैयार करा-2 के खर्च में लाते थे, परन्तु जबसे कि यह बनिये जमीन माता के नाम का पाप कराते हैं जबसे साल-ब-साल काल वगैरा डालते हैं; सो यह बनिये काल डाल-2 के टूटा हुआ धन दुनिया का अपने काबू में करते जाते है जिससे जमीन माता के शरीर में जो चाँदी-सोने की खानें थी वोह जादू से गला दी है और गारत कर दी है, क्योंकि सौदागर बच्चे जमीन को तरह-2 की बीमारियाँ करते हैं जिससे जमीन के शरीर की चरबी गल गई है, परन्तु “टूटा हुआ धन तो सब ही विलायतों में था, सो तुम्हारी विलायत के धन पर क्या जादू हुआ जो तुम्हारी विलायतों के घरों में किसी के पास धन नहीं रहा है ?”
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