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जगतहितकाऱणी
और लिए जाते है इसी तरह से सब विलायतों का धन काबू में कर लेंगे, और जो टूटा हुआ धन बाकी रहेगा उसको सौदागरी से रेलों में लाद-2 कर लिए जाते हैं, क्योंकि यह बनिये ऐसे बेईमान है कि “जाहिरदारी में तो अंग्रेजों से भी मिले हुए है और दिल में कपट से पेश आ रहे है,” कि जिस तरह से अगले जमाने के बादशाहों से मिले के तो मिले थे और दिल में कपट रखते थे, उसी तरह से यह बनिये अब भी कर रहे है कि जो अंग्रेजों से मिले के तो मिले है और दिल में कपट रखते हैं जिसकी अंग्रेजों को भी खबर नहीं हैं। सो देखो भाई, जबकि में कर लेंगे, जब इसी तरह से तुम सातों-आठों विलायतों के राजा बादशाहों को धन का लोभ और मदद देके अंग्रेजों की औलाद को गारत करने के लिए लावेंगे, परन्तु जाहिरदारी में तुम से भी मिले रहेंगे और दिल में कपट रखेंगे, और अंग्रेजों की तरह से और हिन्दुस्तान की तरह से तुमको भी निरधन कर देंगे; इसी तरह से जब तुम्हारा भी धन काबू में कर लेंगे और निरधन कर देंगे जब और विलायतों के राजा बादशाह से जा मिलेंगे और उनको भी निरधर कर देंगे, क्योंकि उनको भी आपस में लड़ा के मार देंगे, जब और विलायत वालों को हिन्दुस्तान के घन का लोभ देके लावेंगे और उनको भी निरधन कर देंगे, गर्ज की इसी तरह से सातों-आठों विलायतों के राजा बादशाहों को बनिये हिन्दुस्तान के राज करने का लोभ देके और अपने पास से हर तरह की मदद देके लावेंगे,। और सिवाय बनियों के और किसी विलायत के राजा बादशाह के पास धन नहीं रहेगा, जबकि यह बनिये अपना राज करेंगे कि जिस तरह से अब तुम कुल विलायतों के राजा बादशाह राज कर रहे हो इसी तरह से यह सौदागर बच्चे भी राज कुल विलायतों में किया चाहते है; क्योंकि इन्होंने इसी सबब से राक्षसी पाप चलाया है और इसी पाप से सबकी अकलों को कैद करके धन को अपने कब्जे में कर लिया है और जो बाकी है उसको अब काबू में कर लेवेंगे, जिसकी खबर किसी को भी नहीं और राजा बादशाहों को भी नहीं है कि जिसके जाल से मैं वाकिफ करता हूँ कि जो तुम सब लोग एक दिल होके इन्हों के राक्षसी पाप को छुड़ाने का बन्दोबस्त करोगे तो दफे हो जावेगा, क्योंकि यह बनिये ऐसे ‘बदजात’ है कि जिस तरह से हिन्दुस्तान को आपस में लड़ा करके गारत कर दिया है, इसी तरह से कुल विलायतों का धन काबू में कर लेते हैं और एक-दो-पीढ़ी के बाद उनको भूखे मरने के काबिल कर देते हैं, फिर उनसे यह बनिये फकीरी के भेष में और साहूकारी के भेष में मिलते है और फिर उनको हिन्दुस्तान के धन का लालच बताके और मदद देके लाते है; क्योंकि हिन्दुस्तान का धन इन बनियों ने अपने राक्षसी पप से अपने काबू में कर लिया है इससे इनके पास धन बहुत है, सो अपने पास से मदद देके लाते हैं, सो इनकी गर्ज यह है कि जब हम इनको अपने पास से मदद देके ले चलेंगे तो हमारे बच्चो को यह राजा-बादशाह आराम देवेंगे और हमारे कहने में रहेंगे, सो वो तो हकीकत में ऐसा ही केरेंगे क्योंकि वो तो भूखे मरते हैं इससे राज करेंगे, और इन बनियों की हुकम की तामिल करेंगे क्योंकि “उनको तो इन बनियों ने राज कराया है, भला ! वोह क्यों नहीं बनियों का अहसान मानेंगे ?” वो तो जरुर मानेंगे, परन्तु उन राजा बादशाहों की अकल इनके राक्षसी पाप से ऐसी खराब हो रही है कि जो अच्छे-बुरे काम की भी तमीज नहीं रही है, सो यह सबब राक्षसी पाप का है; क्योंकि जो हिन्दुस्तान में आते हैं वोह यह तो ख्याल नहीं करते कि धन तो सब ही विलायतों में था परन्तु हमारी विलायत का धन कहाँ गया ? जो अब हम दूसरी विलायत में धन के लालच से जाते हैं, क्योंकि सतजग में सब विलायतों में सोने-चाँदी का ठाट और पाट था, इससे गरीब-गुरबा जग कर लेते थे परन्तु अब तो भले ‘अमीर-कबीर’ से भी जग नहीं होता है, जिसकी वजह यह है कि इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से सब विलायतों के लोगों की अकल खराब कर दी है जिससे हिन्दुस्तान में आने वाले यह ख्याल नहीं करते हैं कि जब सब विलायतों मे धन था तो हमारी विलायत का धन कहाँ गया ? और ऐसा राक्षसी पाप हमारे धन पर किसने किया है ? जिसकी तो खबर नहीं है, कि हमारा धन किधर को गया है और किसने ले लिया है ? परन्तु बनियों ने सबकी अकलों को ऐसी कैद की है कि जो हिन्दुस्तान में आने वालों को और उनकी रैयत वगैरा को खबर तक नहीं पड़ने देते हैं और ना फकीरों वगैरा को खबर पड़ने देते हैं और न याद रहने देते है।
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