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जगतहितकाऱणी
परन्तु राजा बादशाह के सामने जाके और कसमें गायें और सुअर की खाकर कहा कि हमने कुल पाप का करना छोड़ दिया, इससे उन राजा बादशाहों ने अपने दिल में यह जाना कि सौदागरांन ऐसी बुरी कसम खाते है, सो वाकई कुल पाप को छोड़ दिया। इस वजह से सौदागरांन को फिर तकलीफ नहीं दी, अगरचे उन्हों को यह मालूम हो जाता है कि यह सौदागर बच्चे झूठी कसम खाते है और कुल पाप नहीं छोड़ा है तो उसी वक्त इस सौदागर बच्चों के कुल को ही गारत कर देते कि जिस तरह से रावण के कुल को गारत कर दिया था, परन्तु सौदागरांन के आधा पाप नहीं छोड़ने की खबर राजा बादशाह को इससे नहीं पड़ी थी कि इन सौदागरांन ने अपने राक्षसी पाप के जादू से अकल को कैद कर दिया था इससे वो राजा बादशाह ऐसे ही जानते थे कि कुल पाप का करना छोड़ दिया है; क्योंकि धर्म की कसमें खाई थी परन्तु इन सौदागरांन ने पीढ़ी दो पीढ़ी गुजरने के फिर वहीं राक्षसी पाप जमीन के नाम से और आदमियों के नाम से कराना शुरु कर दिया है जबसे अब तक करा रहे हैं। अगरचे राजा बादशाह को यह खबर होती कि यह राक्षसी पाप शुरु कर देंगे और हमारे बाल-बच्चों को बाद हमारे मरने के फिर यह बनिये अपने राक्षसी पाप को चलाके संसार को गारत कर देंगे और हमारी बादशाही को डबो देंगे, जब तो इन सौदागरांन को इनकी औलाद समेत जब ही गारत कर देते, कि जो इन सौदागरांन के कुल में “पानी देवा और नाम लेवा” तक नहीं रहता; परन्तु इन सौदागर बच्चों को ऐसा नहीं जानते थे, परन्तु इनके जालों से आप लोगों को वाकिफ करता हूँ, सो आप लोगों को इनकी कसमों का ऐतबार बिलकुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह झूठी कसमें खाके बच जाते है और फिर अपना पाप चलाके संसार को गारत करते है। इससे इन्हों की कसम का भरोसा नहीं करना चाहिए और मेर सामने इन्हों का राक्षसी पाप छोड़ाना चाहिए, क्योंकि इन्हों के राक्षसी पाप की मुझको खबर है, “अगरचे तुम्हारे सामने झूठ बोलेंगे तो मैं इनका झूठ नहीं चलने दूँगा, जब तो यह राक्षसी पाप छूट जावेगा और फिर नहीं चलेगा और मेरे मरने के बाद छुड़ाने का बन्दोबस्त करोगे तो फिर तुमसे नहीं छुटेगा” क्योंकि यह अपने धरम की कसमें खाके बच जावेंगे कि जैसे पहले बच गये थे उसी तरह से फिर करेंगे, क्योंकि इन्होंने अपने राक्षसी पाप से सबकी अकलों को खराब कर दिया है जिससे कुछ मालूम नहीं होता है, परन्तु ख्याल नहीं करते कि जमीन तो वोह की वहीं है और खानें चाँदी-सोने की इस जमीन पर नहीं है वोह कहाँ गई ? सो यह बात इससे इन्हों को नहीं सुझती है कि इन सौदागर बच्चों ने अपने राक्षसी पाप से ऐसी अकल फेर दी है ने अपने राक्षसी पाप से ऐसी अकल फेर दी है जिससे बनियों के जाल की तरफ ख्याल ही नहीं होता है, क्योंकि इन सौदागरांन का दिल इस तरह पर है कि कुल विलायतें गारत हो जावे और थोड़े रह जावें तो हम कुल विलायतों में अपना राज करें। इससे यह अपना राज करने के लिए राक्षसी पाप चलाया है और इसी से सबकी अकलों को कैद किया है सो जाहिर हो रहा है, परन्तु बनियों के जादू की वजह से अकलों पर पड़दा पड़ा हुआ है जिससे इन बातों की तरफ कोई साहब ख्याल नहीं करते हैं; सो यह प्रताप जादू का है, क्योंकि सौदागरांन ने जादू के जोर से हिन्दुस्तान का धान तो अपने काबू में कर लिया है और किसी कदर टूटा हूआ धन बाकी रहा है उसको अब काबू में कर लेंगे। सिवाय इसके और विलायतों को आब गारत किया चाहते हैं जिससे दूसरी विलायत के लोगों को हिन्दुस्तान के धन का लोभ देके लाते है, और यह सौदागर बच्चे अपने पाप से उन्हों को हर तरह की मदद देते है परन्तु दूसरी विलायत के राजा बादशाह यह ख्याल नहीं करते हैं कि जिस तरह से इन सौदागरांन ने हिन्दुस्तान को निरधन कर दिया है उसी तरह से हमको निरधन किया चाहते है; सो इन बनियों का मतलब यह है कि जिस तरह से हिन्दुस्तान में किसी कदर धन रह गया है इसी तरह से दूसरी विलायतों में रक्खेंगे और जिस तरह से कि यह बनिये अंग्रेजों को रह-सहे धन का लालच देके लाए है, इसी तरह से और साथ हिन्दुस्तान के रहे-सहे धन को यह बनिये लोग रेलों में लाद-2 के ले गए है,
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