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जगतहितकाऱणी
परन्तु भाई मेरे हो, जिस परचों को तुम अच्छा समझते हो सो यह अच्छा नहीं है, यह तो निहायत ही खराब जादू है, क्योंकि रावण के मुवाफिक इन सौदागर महाजनांन ने राक्षसी पाप बलराजा के बाद से चलाया है और संसार को और राजा बादशाह और फकीर-फुकरा को करामाती संसार में सुझाते है जिससे संसार के लोग साधु-फकीरों के पीछे दौड़ते फिरते है और हाथ जोड़ के उन फकीरों की खुशामद करते है, कि जो फकीर अपने मुँह से किसी शख्स को यह कह दें कि जा बच्चा तेरा लड़का, जो बीमार है वोह अच्छा हो जावेगा, कि तू देवी के उपर या फलाने पीर के उपर, चार-पाँच या कम ज्यादा बकरा या पाड़ा वगैरा हमारे कहने के मुवाफिक अभी जाकर चढ़ा देना, चुनाचे उसने फकीर के कहने पर यकीन लाके और फकीर के कहने मोजिब उसी कदर बकरे वगैरा लाके चढ़ा दिये कि जिस कदर फकीर ने बताये थे, जो बीमार अच्छा हो गया जब तो फकीर को करामाती और सिद्ध, तमाम जहान के लोग जाहिर करने को लग जाते है और कहने को लग जाते है कि फलाना फकीर बड़ा करामाती है और जो अच्छा नहीं हुआ तो, संसार के लोग यह कहने को लग जाते है कि उसकी ‘कजा’ आ  गई थी। सो भाई मेरे हो, यह तुम्हारी बुद्धि का ‘जौहर’ है कि जो तुम लोग करीश्मों के भरोसे देवतों के उपर जीव देते हो और हाड़ डालते हो और परचों के भरोसे भूले हुए हो, परन्तु यह परचा कोई चीज नहीं है और ना फकीरों, अतीतों के कहने से कुछ होता है; हाँ, ऐसा अलबत्ता है कि जो फकीर है और परमेश्वर की भक्ति करता है तो उसके जीव का भला होता है, दूसरे का भला सिवाय परमेश्वर के नहीं कर सकता है। सो ईश्वर तो सबका ही भला चाहता है वोह किसी के वास्ते बुरा नहीं चाहता है, यह तो सौदागरांन ने रावण की तरह से राक्षसी पाप चलाया है और तमाम जहान की अकल राक्षसी पाप से खराब कर दी है जिससे परमेश्वर को सब भूल गये हैं और बनियों के जाल की सब माला फेर रहे है कि जैसे रावण के वक्त में तमाम जहान के लोग रावण के जाल की माला फेरते थे, उसी तरह से अब इन सौदागरांन के राक्षसी पाप की माला फेर रहे है; और इन बनियों ने सैकड़ों किसम के जाल के रोग तो जाहिर कर दिए है जिससे जमीन माता दिन-2 दुबली होती जाती है, क्योंकि फी जमाने में चाँदी-सोने की खानें बोलते थे वोह बीमारी के सबब से गल गई है, परन्तु यह चाँदी-सोने की खाने हैं जमीन माता के शरीर की चरबी है। लेकिन यह बात काबिल ख्याल करने के है कि जब शरीर में चरबी नहीं होगी तो शरीर की ताकत कहाँ से रहेगी ? बलके उनकी तो ताकत के अलावा हड्डी भी गल जावेगी, चुनाचे अब जमीन माता में ताकत नहीं रही है, क्योंकि इसके शरीर की चरबी गल गई है इससे जमीन माता दुबली हो गई है और दुबली होने के सबब से जमीन के उपर कोई चीच अच्छी तरह से नहीं होती है। जिसकी खास वजह यह है कि इन बनियों ने राक्षसी पाप चला रक्खा है जिससे ना तो मेह होता है और ना जमीन माता सुख से सांस लेती है, जिसकी खबर अब तक तुम संसार के लोगों को बिलकुल नहीं है; अगरचे खबर होती तो अपनी-2 औलाद बचने के लिए बन्दोबस्त करते, क्योंकि रावण वगैरा के वक्त में शनिचर के कहने से बन्दोबस्त किया था जब पाप दफे हुआ था, फिर शनिचर की तरह से अब मैं भी बनियों के राक्षसी पाप से तुम सब संसार के बच्चे बचने के लिए तुम सबको वाकिफ करता हूँ जिसका बन्दोबस्त तमाम जहान के हिन्दू-मुसलमान और अंग्रेज वगैरा अपनी-2 औलाद बचने के लिए इस किताब (जगतहितकारनी) के ‘मज़मून’ को पढ़कर के बंदोबस्त करो जब दुमको और तुम्हारी औलाद को अच्छी तरह से आराम मिलेगा। अगरचे बंदोबस्त नहीं करोगे तो यह बनिये दूसरी बादशाहत को अब लाकर हिन्दुस्तान का राज कराएँगे, इससे मैं सबको पहले से वाकिफ करता हूँ कि जो पहले से ही इन बनियों का जाल मिटा दिया जावे तो फिर दूसरी विलायत का बादशाह हिन्दुस्तान में राज करने को हरगिज-2 नहीं आवे, क्योंकि जब पाप दफे हो जावेगा तो सतजग हो जावेगा और सबकी बुद्धि दुरस्त हो जावेगी; जब कोई किसी की चीज को लेना अच्छा नहीं जानेगा, और अब तो इस गरिज से दूसरी विलायत के बादशाह हिन्दुस्तान में आते है कि हमारे पास धन ज्यादा हो जावे, परन्तु यह खबर किसी को भी नहीं है कि हमारे मुलक में इस कदर धन था वो कहाँ गया ? क्योंकि उस धन को इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से पहले ही खेंच लिया और अकल को खराब कर दिया, जब भूखे मरते आते है कि शेर अधाया और धापा हुआ होता है तो किसी पर हमला नहीं करता है और जबकि भूखा होता है जब उसके सामने कोई जानवर आवे, फाड़ खाता है। इसी तरह से बादशाहों का हाल है क्योंकि इन सौदागरांन का इरादा चार कूंट में राज करने का है, इससे संसार के लोगों की अकल फेर दी है कि जो दूसरों का ही बुरा करना सुझता है और भला करना नहीं, जिसकी वजह यह है कि एक-दूसरे का बुरा चाहेगा जरुर तनाजा होगा, तो आपस में लड़ाइया और दंगे होंगे और लोग आपस में लड़-2 के मरेंगे; इसी तरह से राजा बादशाहों में भी आपस में बिगाड़ रंज हो गए हैं कि जो एक-2 को देख के राजी नहीं है और दिल में ऐसा इरादा है कि मैं इसको मार डालू तो इसका राज मेरे कब्जे में हो जावे, गर्ज कि दोनों में से एक का भी मतलब और मुराद हासिल नहीं होती है और आपस में लड़कर मर जाते है और फिर उस चीज के मालिक ऐरी-गेरी और ही याने यह बनिये लोग बन बैठते है,
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