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जगतहितकाऱणी
सो ऐसे-2 तो हिन्दू-मुसलमान इन बनियों के लाड़ रखते है परन्तु यह बनिये ऐसे बदमाश और हरामकार है कि यह अपनी हरकत से बाज नहीं आते है; सो इन बनियों के जालों को और बेईमानियों को तमाम जहान के राजा बादशाह और हिन्दू-मुसलमान और अंग्रेज वगैरा मुलाहजा करो और सोचो कि इन बनियों ने जादू के जोर से अव्वल ही अव्वल में तो राजा बादशाहों के खजानों को जमीन के रास्ते से खेंच लिया है और खेंच लेते है याने जमीन को फाड़-2 के और जिन बादशाहों को, कि खराब कर दिया है; सो उन बादशाहों के खजानों को जादू के जोर से पहले ही खेंच लिया था कि जो खजाना कदीमी थे, परन्तु जबकि यह बनिये किसी के खजानों को खेंचना चाहते हैं तो पहले जमीन के फटने के नाम का जादू कराते है जब जादू के जुलम से जमीन माता फट जाती है, जब राजा बादशाहों के खजानों को खेंच लेते हैं, परन्तु जादू सौदागर महाजनांन समुद्र के उपर किसी टापु में कराते है कि जहाँ चौरासी लाख कुण्डियाँ राध लहू की बनाई है, सो दुनिया में उस पाप की सब तारीफ और बिखान करते है कि मालिक के घर में चौरासी लाख कुण्डियाँ राध लहू की नारगी पड़ने की है, सो इन बनियों ने उस गुप्का किस्सा चला दिया है। सो सुन-2 के कहते है और इन बनिये महाजनांन ने स्वर्ग और नर्क भी रावण की तरह से बनाया है सो जबकि ‘चौरासी लाख जीवाजून को चौरासी लाख कुण्डियों के उपर दुख देते है जब जादू चलता है,’ और जिस तरह के जाल कि दुनिया में तरह-2 के चल रहे है यह बनियों के घर का “इन्द्रजाली” पाप है और इसी “इन्द्रजाली” पाप से तमाम राजा बादशाहों की अकल और संसार के लोगों की अकल फेर रखी है जिससे यह सौदागर अपने जाल को संसार के लोगों पर जाहिर नहीं होने देते हैं और खजानों को खेंच लेते है और राजा बादशाहों को औऐर संसार के लोगों को ऐसा सुझा देते है कि धन सरक गया, और राजा बादशाह और संसार के लोग ही ऐसा कहने को लग जाते है कि लक्ष्मी सरक गई है और यह नहीं कहते है कि यह बनियों के घर का राक्षसी पाप है परन्तु वोह किस तरह से कहें, क्योंकि उनकी अकल तो राक्षसी पाप में कैद हो रही है इससे वोह जाल को नहीं पहचानते हैं और जिस तरह से कि यह बनिये जादू के जोर से खजानों को खेंच लेते है, उसी तरह से यह बनिये मंदिरों की पुतलियों को भी संसार के भुलाने के लिए जमीन को फाड़-2 के उड़ा देते है और मंदिरों को भी उड़ा देते है और फकीरों के दिल में और जतियों के दिल में और राजा बादशाहों के दिल में ऐसा सुझा देते है कि जोगी-जती बड़े करामाती है। सो जोगी-जती अपने दिल में यह कहने को लग जाते है कि बम बड़े करामाती है और सिद्ध हो गये है जिससे संसार के लोग भी यह जानते है कि जोगी-जती बड़े करामाती है, परन्तु जोगी-जती जिन्दा ‘समाधी’ लेते है, जिसकी वजह यह है कि सौदागर महाजन जादू के जोर से जमीन को फाड़ देते है। सो जमीन को सौ कोस तक फाड़के पोली कर देते है, जब वोह जती-जोगी सौ कोस के उपर उस रास्ते से होके बाहिर निकलते है, सो यह बात काबिल गौर करने के है कि जहाँ तक इन बनियों के दिल में आता है उसी कदर जमीन फाड़ के जादू के जुलम से पोली कर देते है, सो अगर यह बनिये अपने राक्षसी पाप से जमीन को कोस दो कोस में फाड़ देवे जब तो जती-जोगी कोस, दो कोस के उपर जाके बाहिर निकलते है। अगरचे तीन-चार कोस जमीन को फाड़ देवे तो तीन चार कोस के उपर जाके बाहिर निकलते हैं, और जो ज्यादा दूर तक फाड़े तो ज्यादा दूर पे जाके निकलते हैं और जो कम जमीन को फाड़ें तो कम दूर पे जाके बाहिर निकलते है; और यह बनिये ऐसा भी करते है कि जो पहले जमाने में भक्त लोग महादेव और देवी-देवता वगैरा हुए है उनकी समाधियों के उपर मंदिर वगैरा बना दुए है और उनकी समाधियों के उपर लोग बकरा वगैरा चढ़ाते है कि जिनके गुण तमाम जहान के लोग गाते है और उनकी पूजा करते है, तो यह बनिये लोग जादू के जोर से जमीन को फाड़ के और उनके मंदिरों की पुतलियों को जिस कदर दूर पे बाहिर निकालना मंजूर होवे, निकाल देते है और दुनिया को अपने जादू से ऐसा सुझा देते है कि देवी-देवता वगैरा फलानी जगह पर निकले है और यह रोग जमीन माता को इस तरह का है कि जैसे आदमी के बदन में बादी सोजन और चीस और चबक हो जाती है और वोह सोजन और चबक और चीस मिसलन आदमी के सर में होवे और वोह एक साथ ही फौरन पाँव में आ जावे और पाँव में से कमर में आ जावे, उससे आदमी को बहुत सख्त तकलीफ होती है कि मरने लायक हो जाता है।
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