सो भाई मेरे, हिन्दू-मुसलमान, अंग्रेज वगैरा यह बात काबिल सोचने और ख्याल करने के है कि जिस तरह से राजा रावण ने और हरनाकुश राजा ने और कंश राजा वगैरा ने मेह को और मौत को अपने बस में कर रक्खा था, उसी तरह इन सौदागर महाजनांन ने भी मेह को और मौत को अपने बस में कर रक्खा है जिससे काल वगैरा पड़ जाते है और हजारों तरह की बीमारियाँ हो जाती है। यह सब सौदागर महाजनांन के घर का राक्षसी पाप है, क्योंकि परमेश्वर ने सब जीवाजून को तरह-2 के आराम दिये हैं और कोई बात दुनिया के आराम देने के लिए बाकी नहीं रक्खी। सो भाई मेरे हो, “कि जो शख्स, जो चीज अपनी कुदरत से बनाता है वोह हरगिज-2 अपने हाथ से नहीं बिगाड़ता है और वोह चीज उसी हालत में खराब होती है कि जब उसकी उमर पूरी हो जाती है” परन्तु अब कोई इस बात को गौर करो कि जब दिन बहार के आते हैं तो झाड़ वनास्पति वगैरा उस जंगल ‘बयाँबान’ में जहाँ वनास्पति के सिवाय दूसरी चीजों का नाम नहीं होता, तो वोह कैसे सुहावने और अच्छे दिखलाई देते है और जह दिन पतझड़के आते हैं, तो दरखत वगैरा उस बयाँबान में, कि जहां सिवय दरखतों मालूम होते है ? और पतझड़ होकर सूखे दरखतों के मानिन्द हो जाते है, परन्तु पत्ते पीले जरद होकर और उमर पाके गिरते है और बगैर उमर पूरी होने के, एक पत्ता भी दरखत की डालियों में से हरगिज-2 नहीं गिर सकता है; हाँ! ऐसा अलबत्ता हो सकता है कि अगर कोई आदमी हाथ से पत्तों को या डालियों को तोड़े, तो बेशक कच्ची उमर में तोड़ सकता है या राक्षसी पाप से तोड़ सकता है, कि जब दरखतों वगैरा के नाम का राक्षसी पाप कराते हैं तो ज्यादा हवा और आँधी वगैरा चल करके करोड़ों दरखत जड़ समेत उखड़ करके गिर जाते हैं, तो पत्तों का गिरना क्या मुश्किल है ? परन्तु यह राक्षसी पाप से हो सकता है और राक्षसी पाप के चलाये बगैर और कोई भी ऐसा नहीं कर सकता है, फिर आदमी की भी उमर इसी तरह से है, क्योंकि बगैर पूरी उमर के हरगिज-2 नहीं मर सकता है और ना दरम्यान में बगैर पूरी उमर के ईश्वर मारता है; और अब जो साल-ब-साल करोड़ों आदमी कच्ची उमर में ही मर जाते है, और यह ख्याल करने की बात है कि पहले सतजग में क्या कोई और दूसरा मालिक था, कि जो पूरी उमर पाके मरते थे ? और इस जमाने में क्या मालिक दूसरा है जो पहले के सी उमरें नहीं होती ? सो खूब सोच लो कि इन बनियों का यह मतलब है कि पाप करा-2 के संसार को मार देवें और जब संसार थोड़ा रह जावे जब सब विलायतों में हम अपना राज कर लेवें। इस बात की तलाश अंग्रेज वगैरा भी नहीं करते हैं लेकिन उनको भी असली भेद नहीं मिला, मगर कच्ची उमर में मरने का असली भेद यह है कि आदमी बगैर जादू के कच्ची उमर में नहीं मरता है और ना यह ईश्वर का हुकम है; हाँ, जादू के जुलम से कच्ची उमर में मर सकता है जिसकी खास वजह यह है कि जिसके नाम का जादू यह सौदागर महाजनांन कराते है, तो वोही मर जाते है और जिसके नाम से जादू नहीं कराते है वोह नहीं मरते हैं। सो यह जादू का काम दरियाओं के किसी टापु के उपर करा रहे है कि जहाँ सिवाय सौदागर महाजनांन के और कोई नहीं जा सकता है, परन्तु यह सौदागर महाजनांन ऐसे बदमाश और बेईमान है कि जाहिरदारी में तो बहुत ही गरीब होके रहते है और लोगों को दिखाने के लिए इस कदर भक्ति में चलते है कि बनियों के बराबर कोई भक्त नहीं है, सो यह बनिये बेईमान लोगों को दिखाने के वास्ते भक्ति करते है कि हमारा जाल किसी पर जाहिर नहीं होगा; अगर किसी को मालूम भी हुआ तो हमारे पुण्य को देखके लोग हमारे जाल पर यकीन नहीं लावेंगे, इससे तमाम जहान के बनियों को देख लो कि बनिये लोग जाहिरदारी में किस कदर पुण्य वगैरा करते है और छांने में कपट ही कपट और दगा ही दगा कर रहे हैं कि जैसे रावण करता था; उसी तरह से यह बनिये भी कर रहे है और जिस तरह से रावण संसार के हाथों से देवतों के उपर हाड़-मांस डलवाता था, उसी तरह यह बनिये भी अब देवतों पर हाड़-मांस को संसार के हाथों सो डलवा रहे हैं। सो संसार को तो कुछ दोष नहीं है, क्योंकि उनको जादू से बीमार करके देवतों का सुझा देते है कि देवतों ने बीमार कर डाला है, |