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जगतहितकाऱणी
सो ऐ भाइयों, यह ख्याल करने की बात है इससे तुमको बार-2 समझाके हिदायत करता हूँ कि महरबानी करके और मेरी आजीजी पर खयाल फरमा के इस काम को भी समझो और ख्याल करो, क्योंकि मैं सिर्फ तुम्हारे बच्चे बचने के वास्ते इन बनियों के जाल को समझाता हूँ और ‘तुम लोग पागल और सिरड़ी कहते हो, सो मेरे दिल में कैसी बुरी आती है कि सर फोड़ के मर जाऊँ’ परन्तु इस ख्याल से ऐसा नहीं किया जाता कि जो में ही इन बनियों के जाल से वाकिफ नहीं करुँगा तो फिर कौन करेगा ? क्योंकि इन बनियों ने मुझको अपने जाल से कलपाया है इससे मैं बनियों की चोरी जाहिर करता हूँ और इसी वजह से मैं अपने उपर यह काम उठाके इन बनियों के जाल से वाकिफ करता हूँ, और किसी के बुरे-भले कहने को ख्याल में नहीं लाता हूँ और जगह-2 जाके समझाता फिरता हूँ; सो सच-2 जानना और सब संसार के लोग इन सौदागरांन के पाप को छोड़ाने की कोशिश करो, क्योंकि रावण और हरनाकुश और संश, कारुन वगैरा ने पहले भी राक्षस विद्या का पाप चलाया था और अपने दिल में यह विचार किया था कि चारों कूंट में अपना राज करुँ, जब मेरी मरदानगी है; परन्तु उनके राक्षसी पाप की चोरी सब संसार में प्रगट हो गई, इससे कुल संसार ने उनके पाप का बन्दोबस्त करके छोड़ा दिया था, परन्तु रावण की तरह से इन बनियों ने भी राक्षस विद्या का पाप चलाया है, सो चार कूंट में राज करने के वास्ते और दिल में यह भी विचारा है कि हम बनिये तमाम जहान में अपना राज करें। इससे मैं आपको बार-2 इन बनियों के जाल से वाकिफ करता हूँ कि यह बनिये लोभ ही लोभ में तमाम जहान को गारत कर देंगे, परन्तु यह महाजन लोग अलाहदा के अलाहदा रह जावेंगे, सो सब संसार को अपस में लड़ाके मार देवेंगे, इससे तमाम जहान के लोग जल्दी एक दिल हो जाओ जिससे तमाम जहान के लिए बहत्तर है, नहीं तो तमाम जहान की औलाद रहने की नहीं है; और अपने हिन्दुस्तान में तो सरपंच तुम अंग्रेज ही हो, इससे मैं साध (अनोपदास) हाथ जोड़कर अर्ज करता हूँ कि इन सौदागर महाजनांन के जाल की पहचान करो और इनके जाल को छोड़ाने का बंदोबस्त जल्द करो, और यह भी समझने की बात है कि इन बनियों के जाल की किसी जात में खबर नहीं है, कि यह बनिये हमको जाल से मारते है तो भी हिन्दू-मुसलमान इन बनियों का किस कदर दिल रखते है कि जैसे बच्चे अपने माँ-बाप का दिल रखते है और माँ-बाप बच्चों का दिल रखते है; उसी तरह से हिन्दू-मुसलमान इन बनियों का दिल रखते हैं, सो दुनिया में सब ही जानते हैं और कहते है कि बनिये भाई बार है, क्योंकि बादशाहों ने इन सौदागरांन को ऐसी पदवीं दी है कि ‘पहले शाह और पीछे बादशाह’ सो यह बात काबिल ख्याल करने की है कि यह सौदागर महाजनांन करोड़ों तरह के जाल जाहिर करते हैं, तो भी राजा-बादशाह और रैयत इन सौदागरांन को ही सच्चा जानते है कि जिससे शाह की पदवीं इन सौदागरांन को बख्श रखी है कि जो आगे बाप का नाम आता है और बाद में बेटे का, परन्तु इसकी असली वजह यह है कि बादशाहों को इस बात की बिलकुल खबर नहीं है, कि यह महाजन लोग मिलके दगा करते है बलके वोह तो ऐसा जानते है कि यह बनिये बड़े सती है और नेक है जिससे इन महाजनांन को शाह की पदवीं दे रखी है, कि जो पहले इन सौदागरांन का नाम आता है और उसके बाद बादशाह का नाम आता है। सो यह बात काबिल गौर करने की है कि राजा बादशाह इन सौदागरांन का इस तरह से तो लाड़ रखते है और कहते है कि “जहाँ सौदागर महाजनांन नहीं, वहाँ राज नहीं”, सो ऐ तमाम जहान के राजा बादशाह और रैयत, अपने-2 दिल में, साथ गौर के ख्याल करके देखो कि इन महाजनांन के ऐसे-2 तो भरोसे और ऐतबार करते है तो भी सौदागर महाजनांन अपने फरेब और बदमाशी से बाज नहीं आते है, और रावण की तरह से दरियावों के पार किसी टापु के उपर यह सौदागर महाजनांन गुप्ती पाप करा रहे है, जिससे संसार में बीमारियाँ साल-ब-साल होनी शुरु हो जाती है और इन ‘नाकिस बीमारियों’ से करोड़ों आदमियों को मार देते है, जिसकी तारिफ तमाम जहान के लोग अपनी-2 जबान से अदा करते हैं, कि यह परमेश्वर की कुदरत है और सिवाय परमात्मा के कौन ऐसा कर सकता है ?
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