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जगतहितकाऱणी
कच्ची उमर में मार देते हैं। सो इस पाप की वजह से लाखों में एक-दो की ही पूरी उमर होती है, सो मुझको तो इस बात का गम नहीं है परन्तु यह बिय मुझको अपने राक्षसी पाप से कच्ची उमर में मार देंगे, इस बात पर अलबत्ता गम है कि “जब मुझको मार देंगे तो फिर बियों की चोरी को कौ जाहिर करेगा?” क्योंकि बनियों के तो दिल में यह है कि इसने हमारा जाल पकड़ा है सो इसको मार देवेंगे तो हमारे वास्ते अच्छा है, क्योंकि हमारा जाल फिर अच्छी तरह चल निकलेगा, इससे यह बनिये मुझको अपने राक्षसी पाप से मारना चाहते है कि हम बनियों का जिस कदर जाल है वोह सब शनिचर की तरह से इसको मालूम है, अगरचे इसको हीं मारेंगे तो हमारा जाल किस तरह से चलेगा, क्योंकि, शिचर की तरह से यह तमाम जहान को हमारे जाल से वाकिफ कर देगा। जब संसार के लोग फौरन हमारे जाल को छोड़ा देंगे तो फिर हम दुनिया को किस तरह से गारत करेंगे, औऱ क्यों कर उनका धन अपने काबू मैं आवेगा? सो इन बनियों के दिल में तो राक्षसी पाप कराने की रहती है इससे ऐसा ही सुझता है, और रावण के वक्त में तो रावण ने शनिचर को कलपाया था जब शनिचर ने भविक्षण से कहा कि जो तू मेरे जीतेजी पाप को छोड़ा देगा जब तो तू भी सलामत रह जावेगा और मुझको जादू से तुमने मार दिया तो संसार तुम्हारी जान भी निकाल देगा, को रावण के साथ तुम भी मारे जाओगे, क्योंकि रावण ने शनिचर को कलापाया था जब शनिचर ने भविक्षण से कहा कि जो मेरे जीतेजी तुम और तुम्हारा भाई रावण पाप को छोड़ देगा जब तो तू भी बच जावेगा और जो कि मुझको जादू से मार दिया तो संसार तेरी भी रावण के साथ जान निकाल देगा, क्योंकि संसार को तुम्हारे राक्षसी पाप की खबर नहीं है, परन्तु मैंने तुम्हारा जाल पहचान लिया है और पहचान करके तुम्हारे जाल से वाकिफ किया, सो तुम मेरे सामने अपना राक्षसी पाप छोड़ दो कि जिस कदर तुमने चलाया है क्योंकि तुमको तुम्हारा कुल जाल मालूम है। अगरचे तुम मेरे सामने अपने पाप को नहीं छोड़ोगे तो दुनिया को तुम आधा पाप छोड़ के बता दोगे और वगैर छोड़े यह बात प्रगट कर दोगे कि हमने छोड़ दिया, सो तुम्हारे जाल को संसार के लोग किस तरह से जानेंगे कि पाप को छोड़ा है कि नहीं छोड़ा है? क्योंकि वोह तुम्हारे राक्षसी पाप को पहचानते ही नहीं, सो तुम इस जाल को मेरे सामने छोड़ दो, सो शनिचर के कहने को समझ करके भविक्षण ने कहा कि “मैं तुम्हारी जबान से तिरना चाहता हूँ सो मैं अपने कुल में राक्षसी पाप नहीं चलने दूँगा,” क्योंकि भविक्षण को तो पाप का छोड़ना ही मंजूर था, इससे शनिचर के कहने को मंजूरकर लिया और छोड़ने को तैयार हो गया, परन्तु जबकि इस हाल को भविक्षण ने रावण से कहा तो रावण ने शनिचर के सामने राक्षस विद्या के छोड़ने में इन्कार किया, जब शनिचर ने तंग किया जब रावण ने अपने राक्षसी पाप को बता दिया परन्तु कुछ बताया और कुछ नहीं बताया। जब शनिचर ने यह देखा कि यह पूरा पाप नहीं बताता है कि जिस कदर इसका पाप है, हालांकि मुझको रावण का राक्षसी पाप कुल मालूम है कि जिस कदर यह करता है, परन्तु रावण अपने पाप को मेरे से अलोप रखता है, जिसकी वजह यह है कि जो किस कदर मेरा पाप छांने रह जावेगा, तो मैं पीढ़ी, दो पीढ़ी के बाद फिर अफना राक्षसी पाप चला दूँगा, परन्तु शनिचर बड़ा अकलमंद और समझदार था कि जो रावण की चोरी को पकड़ लिया था, लेकिन रावण तरह-2 के जाल करके अपने पाप को छुपाता था, मगर शनिचर रावण की रेबी बातों को बिलकुल नहीं मानता था और रावण को तंग करता था, चुनाचे रावण ने अपना रकाषसी पाप कुल नहीं बताया। जब शनिचर ने भविक्षण से रावण के पाप को दरियाफ्त किया तो भविक्षण ने रावण का राक्षसी पाप कुल बता दिया, कि जिस कदर रावण गुप्ती पाप काता था, इससे शनिचर के दिल में रावण की तरफ से शक पड़ गया, इस वजह से शनिचर ने रावण के राक्षसी पाप से तमाम जहान को वाकिफ कर दिया कि रावण का मुझको भरोसा नही है, क्योंकि इने राक्षसी पाप बिलकुल नहीं बताया है, सो अचरज नहीं कि एक-दो पीढ़ी के बाद फिर अपना राक्षसी पाप चला देंवे, क्योंकि यह मेरे सामने भी झूठ बोलता है तो तुम लोगों के सामने तो किस तरह से सच बोलेगा? इससे मैं तमाम जहान के राजा बादशाह और रैयत को इस रावण के राक्षसी पाप से वाकिफ करता हूँ कि जो तुम्हारी मरजी में आवे वोह रावण के जाल का बन्दोबस्त करना,
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