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जगतहितकाऱणी
अदा नहीं किया जाता, वोह बनियों के घर का चलाया हुआ है कि जिस तरह से रावण ने राक्षस विद्या का पाप चलाया था, उसी तरह से बनियों ने भी राक्षस विद्या का पाप चलाया है जिससे सबकी अकल भ्रष्ट हो रही है कि समझाने से भी नहीं समझते है; क्यूँकि मालिक ने तो सबको उमर पूरी दी है परन्तु यह जो कच्ची उमर में मरते है सो यह गुप्ती पाप से मर जाते हैं, सो इस कच्ची उमर के मौत का ख्याल करके संसार के लोगों को बनियों के जाल से वाकिफ करना जरुर बात समझा कि “जो मेरे जीतेजी इन सौदागरांन का जाल छूट गया जब तो छूट जावेगा, जब संसार के बच्चे बच जावेंगे नहीं तो बनियों की चोरी किसी पर जाहिर नहीं होगी” क्योंकि यह सौदागर लोग सबसे मिल जाते हैं और मिलके सबकी अकल को भ्रष्ट कर देते है जिससे फिर संसार के लोगों को ऐसा सुझता है कि जो बनिये कहते है वोह सच समझते हैं। अब मेरा लिखना है कि जिस तरह से शनिचर ने रावण के जाल से संसार को और राजा बादशाह को वाकिफ किया जब राजा बादशाह ने एक दिल होकर रावण के राक्षसी पाप को छोड़ाया, उसी तरह से अब मैं संसार के राजा बादशाह और रैयत को बनियों के जाल से वाकिफ करता हूँ और इन बनियों का जाल पकड़कर सलाह बताता हूँ, सो सब संसार के लोग मिलके इन सौदागरांन के जाल को छोड़ाओ ताकि तुम्हारे बच्चे इन बनियों के राक्षसी पाप से बच जावें और संसार में पीछा सतजग हो जावे, और कुल चीजें संसार में सतजग की तरह से होने लगे कि जैसे पहले जमाने में होती थी उसी तरह से अब भी होने लगे; सो जबकि सतजग होगा तो चाँदी-सोने की खानें भी प्रगट हो जावेगी और जबकि आदमी बीमार होता है और दुबला होता है तो उशका शरीर कमजोरी के सबब से दुबला हो जाता है और चरबी नहीं रहती है, क्योंकि दुख की वजह से गल जाती है, परन्तु जब वोह बीमार आदमी अच्छा हो जाता है तो फिर वोह अच्छा होने की वजह से दिन-2 ताजा होता जाता है और जिस तरह से कि उसके शरीर में ताकत आ जाती है, उसी तरह से चरबी भी बढ़ती जाती है, इससे यह बात समझने के लायक है क्योंकि जिस तरह से अपने शरीर में कुल चीजें है और वोह बढ़ती जाती है, उसी तरह से जमीन माता के शरीर में भी गोस्त, खून, हड्डी और चरबी वगैरा है। जसकी पहचान इस तरह से है कि “जो पहाड़ है वोह जमीन माता के शरीर के हाड़ है और जो कि मिट्टी है वोह जमीन माता के शरीर का गोस्त है और जो कि चाँदी-सोने की खानें हैं वोह जमीन माता के शरीर की चरब है और जो कि हीरा-पन्ना है वोह पहाड़ों का रुप है,” परन्तु यह बनिये राक्षसी पाप से काल पड़ा रहे हैं जबसे जमीन माता दुख  पा रही हैं जिससे जमीन माता के शरीर की चरबी गल गई है, और इसके शरीर की रोशनी भी जाती रही है। सो देखो भाई! कि जिस तरह से आदमी का शरीर बीमारी के सबब से कमजोर हो जाता है और बदसूरत लगने लगता है, इसी तरह से जमीन मता का भी रंग बदल गया है कि जो कोई भी नहीं पहचान सकता है औऱ जमी माता का शरीर तो मालिक ने अपनी कुदरत से और ही किसम का और आदमी औऱ जीवाजून का सरुप और तरह का ही बनाया है, और अलावा इसके झाड़ वनास्पति का सरुप औऱ ही तरह का बनाया है। सो भाई मेरे हो, परमेश्वर ने अफनी कुदरत से सबके सरुप न्यारे-2 बनाए है कि जो जमीन के उफर मौजूद है सो तुम तमाम जहान के लोग इस बात का ख्याल दिल से रखना कि जिस दिन तुम तमाम जहान के लोग एक दिल होकर इन बनियों के जाल को छोड़ाओगे जब जमीन माता का शरीर तैयार हो जावेगा और पहाड़ का जो सरुप है वोह भी हीरा-पन्ना की तरह से चमकने लगेगा, औऱ हीरा पन्ना यह पहाड़ है परन्तु जब जमीन मताता की बीमारी जाती रहेगी जब कुल चीजें मेवा मिष्टान वगैरा और चरबी वगैरा सतजग की तरह से होने लगेगी; जब यह जानना कि बनियों ने राक्षसी पाप छोड़ा है, नहीं तो यह बनिये अपने राक्षसी पाप से कुछ का कुछ सुझाके भुला देवेंगे, क्योंकि यह बनिये कुल पाप को नहीं छोड़ेंगे औऱ तुमको थोड़ा राक्षसी पाप छोड़के यह सुझा देंगे कि हमने राक्षसी पाप छड दिया है। सो यह बात तुम अच्छी तरह से ख्याल करना कि जब यह बनिये पाप को छोड़ देवेंगे जब तो कोई भी कच्ची उमर में नहीं मरेगा और तुम तमाम दुनिया के लोगों की ऐसी बुद्धि हो जावेगी कि एक-2 को चाहने लगेगा और शेर-बकरी शामिल चरेगी; अनबोलों मेंभी ऐसा सम्प होगा और कुल चीजें सतजग की तरह से पैदा होगी, जब यबह  जाना कि इन बनियों ने दुनिया के नामका पाप छोड़ा है, और जो कि यह पाप कराते हैं वोह अलोप कराते है। अगरचे जाहिरदारी में करें जब तो हर कोई इनके पाप को छोड़ा देवे परन्तु गुप्ती पाप की वजह से किसी पर इनका पाप साफ-2 जाहिर नहीं होता है कि किस कदर पाप कराते हैं और कहाँ पर कराते हैं इससे किसी से भी इनका पाप कराना नहीं छोड़ाया जाता परन्तु इन बनियों ने तो मुझको अपने राक्षसी पाप से रु-ब-रु कलपाया है, इससे इनकी चोरी मालूम हुई और जिस कदर पाप से नुकसान हो रहा है वोह में अपनी नजरों से देखा रहा हूँ, इससे आप लोगों को इस लिखे हुए पर गौर फरमाना मुनासिब हैं कि “मालिकके घऱ से तो सबकी उमर पूरी दी हुई है और इस जमाने में तो आधमी की उमर (125) बरस की है, सो एक सौ पच्चीस बरस की उमर मेरी भी है और मेरा जनम चैत्र सुदी (14) संवत् (1905) का है सो इस मिति और संवत् से लगाकर संवत् (2030) तक मेरी उमर होनी चाहिए, क्योंकि यह कुछ आदमी की दी हुई थोड़ी ही है ! यह तो परमेश्वर की दी हुई है औऱ इशी तरह से कुल जहान के लोगों की उमर (125) बरस की है” परन्तु यह किसी को भी पूरी उमर नहीं पाने देते है और कच्ची उमर में मार देते हैं।
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