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जगतहितकाऱणी
क्योंकि तुम बनियों ने हमको अपने राक्षसी पाप से भुला रक्खा है इससे हम संसार के लोग तुम बनियों के जाल से बहके-2 और भूले-2 फिरते हैं। सो यह तुम बनियों का राक्षसी पाप है कि जिस तरह से रावण ने संसार को भुलाया था और पाप करने की जगह को स्वर्ग और नर्क, दुनिया को भुलाने के लिए कहा करता था और सबकी अकल को राक्षसी पाप से कैद कर दिया था, उसी तरह से तुम बनियों ने भी अपने राक्षसी पाप से सबकी अकलों को खराब कर दिया है; इससे हम संसार के लोग तुम्हारे पाप करने की जगह को स्वर्ग ही जानते है मगर ‘दोजख’ और ‘बहिश्त’ यह जमीन माता ही है, और जो कि हिन्दू-मुसलमान किताबों को पढ़ते हैं सो यह किताबें सब बनियों के घर की चलाई हुई है सो इनके जाल की खबर हमको तो अब तक नहीं थी परन्तु अब हमको साध अनोपदास ने हमारे बाल-बच्चों की जिन्दगी के वास्ते तुम्हारे जाल हमको मालूम हुआ है, नहीं तो अब तक हम सब जहान के लोग तुम्हारे जालों से बेखबर थे, परन्तु ‘बाबा’ हमारे बच्चे बचने की गर्ज से और सतजग होने की वजह से तुम्हारे पाप को प्रगट किया है कि जो तुम बनिये रात-दिन दुनिया के नाम का पाप किसी टापु के उपर कराते रहते हो, उसको दिखाओ; अगर नहीं दिखाओगे तो हम तुमको और तुम्हारे बाल-बच्चों को जान से मार देंगे, जबकि इन सौदागरांन को ऐसे-2 डर दिए जाते है जब किसी कदर पाप करने की जगह को बताते है परन्तु कुल नहीं बताते हैं, क्योंकि यह सौदागर महाजनांन बड़े जाली और फरेबी है। सो जब तक कि इन सौदागर महाजनांन को अच्छी तरह से संसार के लोग तकलीफ नहीं देंगे जब तक यह सौदागर महाजनांन हरगिज अपने फरेबी हीले से बाज नहीं आवेंगे, क्योंकि हिन्दुस्तान के बनिये उनसे मिले हुए है और यह जाल भी फैलाया हुआ इन सौदागर महाजनांन का ही है, सो इसके छोड़ाने का बन्दोबस्त तुम संसार को लोगों जल्दी से करो ताकि तुम्हारे बाल-बच्चों को आराम मिले, क्योंकि जो सौदागर महाजनांन दिल्ली मण्डल से उठकर पाप करने को रावण की तरह से किसी टापु के उपर हुए हैं, सो वोह वहाँ पर दुनिया के नाम का रात-दिन पाप कराते रहते हैं परन्तु पाप करने वाले बनियों को पाप करने की जगह मालूम है कि जो बल राजा के बाद से अपने कबीले समेत पाप करने के वास्ते निकले हैं, परन्तु यह सौदागर भी उसी तरह से चल रहे हैं कि जिस तरह से रावण लंका में गुप्ती पाप कराता था, उसी तरह से यह बनिये भी गुप्ती पाप करा रहै हैं; परन्तु इन सौदागरांन के गुप्ती पाप करने की जगह किसी राजा बादशाह को और साधु-फकीरों को और सातों-आठों विलायत के लोगों को मालूम नहीं है, न अंग्रेजों को इनके जाल की खबर है और जहाँ-2 कि इनकी दुकानें पहुँच गई है, वहाँ पर इन्होंने अपनी हिकमत से जाल करके खोल दी है परन्तु जहाँ पर कि यह बनिये जाते हैं तो अपना सरुप बदल कर जाते हैं, सो यह या तो फकीरी के भेष में या गरीबी के होकर जाते है या अमीर बनके जाते हैं और शहरों फिरते हैं कि जिस तरह से रावण अपना सरुप बदल-2 के मुलकों-2 में फिरता था और अपना राक्षसी जाल फैलाता फिरता था, उसी तरह से यह सौदागर महाजनांन तरह-2 के भेष बदलकर मुलकों में जाते हैं और अपना जाल रावण की तरह से फैलाते फिरते है। सो किसी को यह बनिये अपने राक्षसी पाप की खबर नहीं पड़ने देते है कि जिसकी तुमको खबर पड़ती कि जो इन सौदागरांन ने राक्षसी पाप चलाया है, मगर यह अच्छी तरह से समझना चाहिए कि इन बनियों ने रावण की तरह से संसार के बच्चे गारत करने के लिए यह राक्षसी पाप चलाया है, और जाल की खबर न होने का यह सबब है कि इन्होंने अपने राक्षसी पाप से पहले ही सबकी अकल खराब कर दी है। सो इस वजह से खराब की है कि कोई भी हमारे जाल को और फरेब को न पहचान सके, और जो कि इन बनियों ने गुप्ती पाप का स्वर्ग बनाया है उसको अपने कब्जे में रखते है और अपनी न्यात बिरादरी के हाथों से दुनिया के नाम का पाप कराते है कि जिस तरह से रावण अपने कुल के हाथों से पाप कराता था, उसी तरह से बलराजा के बाद से इन सौदागर महाजनांन ने दुनिया के नाम का पाप कराना शुरु किया है, और जो कि पाप करा रहे हैं वोह वहीं पर रहते हैं और उसी जगह उनके बाल बच्चे रहते है; क्योंकि वोह मय कबीले के हिन्दुस्तान से उठकर गये हैं
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