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जगतहितकाऱणी
जालसाजियाँ दिखलाई है, इससे में बार-2 लिखकर तुम भूले हुए शख्सों को खबरदार करता हूँ क्योंकि इन बनियों ने फक्त दुनिया के नाम का पाप ही चलाया है और पाप से ही बुरा करते है सो मुझको इनका पाप मालूम हो गया है, जिससे मैं आप लोगों को वाकिफ करता हूँ और लिखता हूँ और तुम सब संसार अपनी-2 आँखों से देख रहे हो कि कैसा जुलम चलाया है? सो जिन-2 रजवाड़ों में ऐसा पाप चलाया है सो सब संसार दरियाफ्त करके देख लो कि इन बनियों ने बुड्ढे आदमियों और औरतों पर कैसा जुलम किया है कि उन्होंको डाकी-डाकन बनाये हैं जिसका हाल तुम संसार के लोगों जरा दिल लगाकर सुनो कि जो छोटा गाँव है उसमें सौ-पचास डाकनियाँ बनाई है और जो कि उससे बड़ा शहर है वहाँ पर बहुत-सी डाकनियाँ बनाई है; परन्तु जो कि बुड्ढे, मरद औरत है तो वोह तीरथ समान है सो वेद और पुराणों में भी लिखा है और दुनिया में भी जानते है कि जो बुजर्ग होता है वोह तीरथ के मानिन्द है, मगर इनके सर बदनामी दे दी है परन्तु यह बनिये ऐके है कि तीरथ सरुपी आदमियों को संसार के हाथों से मरवा देते हैं और तरह-2 की बीमारियाँ भी राक्षस विद्या के पाप से करते है और संसार के दिल में डाकी-डाकनियों का सुझाते है और जो कि डाकी-डाकनियाँ बनाई है उनके दिल में भी ऐसा सुझा देते है, जिससे वोह भी ऐसा कहने को लग जाते है कि हम डाकन-डाकी ही है। सो इस वजह से ऐसी-2 बातें कहने को लग जाते है कि उनकी अकल इन बनियों ने अपने राक्षसी पाप से ऐसी खराब कर दी है, मगर यह बात काबिल ख्याल करने के है कि एक शख्स बहोत फासले पर या कुछ नजदीक बैठा है तो उसका दिल वोह किस तरह से खा सकता है?  क्योंकि जह खाना सामने रखा हुआ है तो बगैर हाथ उठाये हुए के किस तरह से खा सकता है? परन्तु खाना तो उसी हालत में खाया जावेगा कि जब हाथ उठाकर मुँह में ‘लुकमा’ देगा, मगर दिल के चलाने से खाना नहीं खा सकता है, सो यह बनिये तो पाप कराना समझते है कि जो गरीब आदमियों को दुखी करेंगे तो आपस में लड़कर खुद ही मर जावेंगे। सो इन बनियों ने ऐसा राक्षसी पाप चलाया है सो यह पाप रिजक खोने के वास्ते चलाया है कि इस राक्षसी पाप से कुल संसार का धन अपने काबू में कर लेवेंगे, इस ख्याल से इन्द्रजाल का पाप चलाया है सो इन बनियों ने धन कुल जहान का काबू में कर लिया है, सो संसार के लोगों को यह बनिये अपने राक्षसी पाप से बीमार कर देते है और फिर उनके मुँह से यह कहलाते है कि मुझको डाकन लग गई है; सो जब कि उस बीमारी से मर जावे तो फिर कहने को लगते है कि डाकनियों ने खा लिया है, और अब तो जिस दिन से अंग्रेज हिन्दुस्तान में आये हैं जब से डाकनियों के बहाने से जरा कम मारते है और डाकनियों का जलाना-मारना भी थोड़ा बंद किया है, मगर डाकनियों के बहाने से नहीं मारे तो और ही संसार के नाम का जादू से तरह-2 का पाप कराके और बीमार कर-2 के कच्ची उमर में मारते है और किसी-2 को चोरी-छाने जादू से बीमार करके अब भी डाकनियों का सुझाते है तो अब अंग्रेजों से डरते हुए गरीब आदमी चोरी-छाने अब भी डाकनियों की बातें करते है, और चोरी-छाने इस वास्ते करते है कि हमारा जाल मालूम हो जावेगा और अंग्रेज हमारा जाल समझ जावेंगे तो हमारा जाल छोड़ा देंगे जिससे डाकनियों का जलाना-मारना आब बंद किया है. और रावण ने दुनिया के पीछे केई ग्रह लगाये थे कि जिससे केई गरीबों को संसार के हाथों से संसार में बुरा होने के वास्ते दुख दिलाता था, उसी तरह से यह महाजन भी बेचारे गरीब बुडढे आदमियों को और बुडढी औरतों को संसार में बुरा होने के वास्ते डाकन डाकी बनाकर मराते है उसी तरह से यह भी वैसे ही कहीब है; सो संसार के लोग अच्छी तरह से इस बात को सोचो कि रावण जो राक्षसी पाप से बीमार कर देता था और किसी-2 को मार भी देता था सो जब कि दुनिया को खबर पड़ी जब दुनिया ने रावण को मय उसके कुल के मार दिया। सो भाई जबकि राक्षस विद्या से मेह और मौत को सहारे कर लेते है तो फिर राक्षसी पाप के चलाने वाले जो चाहे वहीं कर सकते हैं, सो जबकि संसार इसके तजाने का बन्दोबस्त ना करे जब तो जीने का भी धर्म नहीं हैं, क्योंकि मालिक ने तो सब ही को पूरी उमर दी है सो कदीम और ठेट से बुजर्ग याने बुडढे जईफ होकर मरते है परन्तु इन बनियों ने रावण की तरह से संसार के लोगों की मौत को काबू में कर लिया है लेकिन “पहले जमाने में बाप से पहले बेटा नहीं मरता था” और अब बाप से पहले बेटा मर जाता है,
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