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जगतहितकाऱणी
सो तुम संसार के लोगों तलाश करके देखलो कि जिन-2 रजवाड़ों में ऐसा पाप चला है सो संसार को तो कुछ दोष नहीं हैं, क्योंकि उन बेचारों को तो जादू से बीमार करके भूत-पलीत और देवतों का सुझा देते है तो लोग डरके ऐसे काम करने लग जाते है सो संसार को तो मालूम नहीं है कि यह जादू है वोह तो भूत-पलीत ही समझते हैं क्योंकि भूतों और देवतों के भरोसे भूले है और जिसको जादू से मारना चाहे तो फिर वोह चाहे कितने ही जीव मारे उसको कच्ची उमर में मार ही देते हैं भूत-पलीत और देवतों का बहाना करके, जो तुम संसार के लोगों तलाश करो तो यह पाप तो इन महाजनांन का प्रगट है और संसार के हाथों से बुद्धि फेर के पाप कराते हैं सो इन्होंने संसार में बुरा होने के वास्ते अनबोलों के उपर ऐसा जुलम चलाया है, सो ऐसे-2 पाप देखते जाओ और छोड़ाते जाओ और इनका गुप्ती पाप छोड़ाओगे जब ऐसे फेल दुनिया में नहीं होगे, देखते पाप को जो भूत-पलीत और देवतों वगैरा के नाम से जीव मारते है उसको तो हर कोई छोड़ा देगा, परन्तु इनका गुप्ती पाप छुटना चाहिए जब दुनिया से यह फेल छुटेंगे; जब तक गुप्ती पाप नहीं छुटेगा, तब तक संसार को भूत-पलीत का बहाना करके जादू से बीमार करते रहेंगे और संसार भूल करके डर की वजह से देवतों और भूतों और पलीतों के नाम से अनबोलों को मारते रहेंगे, और भाई मेरे ही गुप्ती पाप वोह है कि जहाँ इन महाजनांन ने चौरासी लाख कुण्डियाँ राध और लहू की बनाई है और तुम सब संसार कहते हो कि वहाँ पर स्वर्ग और नरक है और नारगी डालते हैं, सो वहाँ पर तमाम पाप बनियों के कुल के हाथों से होता है। सो वोह तो ऐसा पाप है कि जैसा रावण ने दरियाओं पार अलोप पाप चलाया था, उसी तरह से इन महाजनांन ने गुप्ती पाप चलाया है सो वोह तो महाजनांन की जात को ही मालूम है और वहाँ पर इनकी जात के सेठमहाजन ही जाते हैं और उसी गुप्ती पाप से देवतों और भूत और पलीतों का दुनिया में फैल चलाया है और उसी फैल से देवतों और भूतों व पलीतों का बहाना कर-2 के करोड़ों जीव मराते हैं। उसका सारा मतलब यह है कि ना तो भूत है और ना कोई पलीत है, यह तो फक्त इन महाजनांन का राक्षसी पाप है और राक्षसी पाप से ही नींद के अन्दर और जागते में सुपने करा देते हैं और कुछ का कुछ सुझाते हैं। सो यह सुपने राक्षसी पाप से ही होते है और इसी तरह से रात-दिन में जागते सुपने करा देते हैं, सो जिस तरह से कि रावण राक्षस विद्या के पाप से केई-2 किसम के सुपने सुझाता था उसी तरह से अब यह बनिये भी केई किसम के सुपने सुझा देते हैं कि जो मेरे हुए मुरदें सुपने में नजर आते हैं। सो भाई मेरे हो, मेरे हुए तो नहीं आते है यह तो राक्षसी पाप से ऐसा सुझा देते हैं कि जिस तरह से बाजीगर लोग ठीकरी का रुपया पैसा करके दिखा देते हैं, ऐसे यह बनिये भी राक्षसी पाप से भूत-पलीत वगैरा सुझा देते हैं, परन्तु भूत-पलीत वगैरा जो सुझाते हैं वोह सब जाल है और कुछ भी नहीं है, क्योंकि “पाप की वो ताकत है कि जो चाहें सो ही कर सकता हैं” और ऐसा बुरा गुप्ती पाप कराते है कि जिसके नाम का गुप्ती पाप करावें तो उसी का बुरा हो जावे और सब विलायतों के नाम का पाप करावें तो सब विलायतों का बुरा हो जावे। सो पाप जो संसार के नाम का कराते हैं सो पाप तो लग जाता है मगर करने वाले बेईमान काफिर है क्योंकि बेचारों अनबोलों को कलपाते है और दुनिया में जादू-2 जो करते है और इन्द्रजाल जो कहते है और राक्षस विद्या और काफिर विद्या कहते है सो पाप तो एक का एक है परन्तु दुनिया के ना समझने के वास्ते नाम अलग-2 लिख दिये है, सो यह चतुराई दुनिया के ना समझने के वास्ते की है मगर दुनिया यह ख्याल नहीं करती है कि पहले रावण, हरनाकुश, कंश, कारुन वगैरा ने राक्षस विद्या का पाप चलाया था जब वोह भी इन बनियों की तरह से कुछका कुछ सुझाते थे, सो यह बात दुनिया में प्रगट है कि यह बातें राक्षस विद्या से सुझाते थे लेकिन यह बनिये तो रावण वगैरा से भी ज्यादा कुछ का कुछ सुझाते हैं, सो इस बात का ख्याल किसी को भी नहीं होने देते है, पेशतर में भी संसार की तरह से भुला हुआ था क्योंकि मुझको राक्षसी पाप से जब तक कि इन बनियों ने दुखी नहीं किया था, जब तक मेरे को कुछ खबर नहीं थी और अब तो जो कुछ मेरे उपर हो चुकी है वोह बीती हुई लिखता हूँ और मुझको तो इन सौदागरांन ने तरह-2 की जालसाजियाँ दिखलाई है,
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